शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

1221

 बैसाखी

ऋता शेखर ‘मधु’

1

पावन है बैसाखी

स्वर्णिम फसलों पर

गाते मधुरिम पाखी।

2

होती आज कटाई

खेतों बीच रबी 

कृषकों को है भायी।

3

बाली जब लहराई

चहका घर आँगन

चुनरी भी घर आई।

4

पायल जब- जब बाजे

गिद्धा बन डोले

बल्ले-बल्ले साजे।

5

खेतों में हरियाली

जगती बैसाखी

फसलें हैं मतवाली।

6

दूर परिंदा गाए

हर्षित  दुल्हन ने

कंगन भी झनकाए।

7

पीपल की छाँव तले

नर्तन की धुन पर

ढोलक की थाप चले।

8

आमों में बौर लगे

कोयलिया कूकी

महुआ के दौर सजे।

17 टिप्‍पणियां:

  1. ऋता शेखर मधु जी के माहिया कल पढ़कर टिप्पणी पोस्ट की।पर टिप्पणी पोस्ट नहीं हो पाई थी। बैसाखी पर उनका सुंदर माहिया सृजन। हार्दिक बधाई।
    विभा रश्मि

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीया विभा रश्मि जी, प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार !!

      हटाएं
  2. बहुत सुंदर माहिया,हार्दिक बधाई आपको।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीया सुरंगमा जी, प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार !!

      हटाएं
  3. बहुत सुंदर सृजन...हार्दिक बधाई ऋता शेखर जी।

    जवाब देंहटाएं
  4. दृश्य आँखों के सामने उपस्थित करने वाले सुन्दर माहिया की बधाई!!!
    शीला मिश्रा, भोपाल।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीया शीला जी, उत्साहवर्द्धक टिप्पणी हेतु हार्दिक आभार !!

      हटाएं
  5. पटल पर मेरे माहिया को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार 🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. सजीव चित्रण प्रस्तुत करते बहुत सुंदर माहिया सृजन।हार्दिक बधाई ऋताशेखर जी। सुदर्शन रत्नाकर

    जवाब देंहटाएं
  7. रश्मि विभा त्रिपाठी18 अप्रैल 2026 को 10:35 pm बजे

    बहुत सुन्दर माहिया।
    हार्दिक बधाई आदरणीया।

    सादर

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर माहिया!

    ~सादर
    अनिता ललित

    जवाब देंहटाएं
  9. आपने बैसाखी की खुशी, खेतों की हरियाली और लोगों की उमंग को बहुत प्यारे तरीके से पकड़ लिया। मुझे खास बात ये लगी कि आपने छोटे-छोटे दृश्यों से बड़ा सुंदर चित्र बना दिया। हर stanza में अलग सा रंग दिखा, लेकिन सब मिलकर एक ही खुशी को दिखाते हैं।

    जवाब देंहटाएं
  10. इतने प्यारे माहिया के लिए आदरणीय ऋता दी को बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं