सेदोका
1.
ख़ूब नचाता
साँसें न लेने देता
वक़्त का ये पहिया
सब बेज़ार,
ख़ुद पर भरोसा
सबका बेड़ा पार।
2.
वक़्त की बेड़ी
पुरज़ोर जकड़
ठहरी-सी ज़िन्दगी
बँधे हैं पाँव,
स्व-सम्बल बनना
टूटेगी फिर बेड़ी।
3.
मन की पीर
वक़्त का मलहम
जीवन होता सुखी,
वक़्त का रुख़
कैक्टस-सा कँटीला
घायल होती आत्मा।
4.
घाव भी देता
फिर ख़ुद भरता
वक़्त बड़ा विचित्र,
जब वो चाहे
बन जाए औषधि
कभी बने औज़ार।
-0-
ताँका
पानी
1.
पानी अमृत
बूँद-बूँद क़ीमती,
बना बेचारा
लूटता जग सारा
कोई न समझता।
2.
सम्भव कहाँ
दुनिया का अस्तित्व
पानी के बिना,
सँभाल-सँभालके
ख़र्च करना इसे।
3.
ख़ुद में भरो
पानी-सी तरलता
जग जीत लो,
पानी-सी सीरत हो
और हो निर्मलता।
4.
ख़त्म हो रहा
जग की प्यास बुझा
पानी प्यासा,
मर गया पानी तो
मिटेगा जग सारा।
5.
हिम पिंघला
गगन से बरसा
बेख़ौफ़ पानी
धारा तर-ब-तर
नदी बेइख़्तियार।
-0-
वक़्त
1.
वक़्त की चोट
बनाती है नासूर
गहरा दर्द,
पीड़ा होती असह्य
पर ज़िन्दगी सह्य।
2.
देता है दर्द
बेरहम समय
है मनमानी,
घबड़ा के हारना
होती है कायरता।
3.
वक़्त का ज़ख़्म
वक़्त ही है भरता
वक़्त के साथ,
सब सहना होता
वक़्त जब जो देता।
4.
स्थायित्व नहीं
तक़दीर की मार,
वक़्त बदला
समय से संघर्ष
फिर मिलता हर्ष।
5.
समय स्वार्थी
करता मनमर्ज़ी
देकर दुःख
अट्टहास लगाता
परमार्थ न भाता।
6.
उम्र से छूटा
हवा संग बह गई
समय -गंध
भगाता ही रहता
पकड़ में न आता।
7.
वक़्त की हाँड़ी
अधपकी-सी उम्र
वक़्त का चूल्हा
नायाब है रसोई
वक़्त ने है पकाई।
8.
वक़्त सुनाता
अतीत की कहानी
अबूझ क़िस्से,
मेरी सोच से परे
वक़्त ही है समझे।
9.
नहीं भूलना
वक़्त ने जो सिखाया
जीवन-पाठ,
वक़्त के हैं ग़ुलाम
यही जीवन-पाठ।
10.
जाल बिछाया
वक़्त है बहेलिया
फँसा जीवन
तड़पें, वक़्त चाहे
तभी छूटेगा प्राण।
-0-
घर
1.
बित्ता भर भू
बित्ता भर आसमाँ
होता अपना
ख़्वाब आया ग़ज़ब
तसव्वुर अजब।
2.
दमकता है
असमान का माथा
सुबह-शाम,
चाँद और सूरज
रोज़ सोता-जागता।
3.
वीर सिपाही
युद्ध पर निकला
घर परेशाँ
दे रहा है आशीष
सकुशल लौटना।
4.
घर लाचार
गुहार है लगाता
हाथ जोड़ता,
मत तोड़ो हमको
माँ-सा पाले तुमको।
5.
दीवारें उठीं
घर बना मकान
आत्मा जो मरी,
नहीं कोई अपना
दीवारें भी हैं
रोती।
6.
बेटी की पीड़ा
माँ-बाबा
स्वर्गवासी,
घर समझे
आगोश में लेकर
बेटी को दुलराए।
7.
घर क्या करे?
ससुराल बुलाता
मायका रोता,
बेटी होती पराई
घर है समझता।
8.
घर सोचता-
त्योहार का मौसम
जल्दी से आए,
खिलेगा कोना-कोना
माँ-बाबा
मुस्कुराएँ।
9.
पुरवइया
साँकल खटकाती
घर में आती,
जागो, हुआ बिहान
दुलार से कहती।
10.
धमा-चौकड़ी
घर है गुलज़ार,
घर देखता
बच्चों की
शैतानियाँ
माँ-सी बलैया लेती।
11.
प्यार -दुलार
सब कुछ लुटाता
घर है बाबा,
उम्र ढली, मगर
ज़रा नहीं थकता।
12.
घर है दुःखी
किराएदार आए
पराया माने
घर बना मकान
कीलों से सजी
भित्ति।
13.
घर बुलाता-
‘‘लौट आ
परदेशी
ज़माना बीता
तेरी-मेरी जवानी
अब वह भी बीती।’’
14.
पाखी बेचारा
जब घर उजड़ा
किधर जाता?
नहीं कोई ठिकाना
ढूँढे नया बसेरा।
15.
घर की ईंटें
मन का राज़ जाने
सबसे छुपा
वह भी पहचाने
साथ में हँसे-रोए।
-0-
भरोसा
1.
भरोसा टूटा
ज़रा न हुआ शोर
चुपके टूटा,
मन के भीतर शोर
आजीवन गूँजता।
2.
विश्वास टूटा
मौन हो दिल रोया
कोई न जाना,
सामने वो जो आया
चेहरा मुस्कुराया।
3.
आँखें खामोश
मन दुःख से रोता
आसरा मिटा,
किससे कहें पीड़ा
सगे ने दिया धोखा।
4.
मिटी जो आशा
दिल चकनाचूर
छूटा न रिश्ता
मन माने, न माने
खींचना होगा
रिश्ता।
5.
यक़ीन ध्वस्त
उम्र भर का दर्द
रिश्ते बेमानी,
मन हुआ पत्थर
दिखाना न असर।
6.
खण्डित आस
रिश्ते हुए काफ़ूर
किससे कहें?
जीवन का ये सच
अकेला हुआ मन।
7.
विश्वास ध्वस्त
कड़वे हुए रिश्ते
मन है स्तब्ध,
स्वयं पर भरोसा
एकमात्र विकल्प।
8.
आस जो टूटी
जीवन का सफ़र
कँटीला हुआ,
ज़ख़्मी, मगर देना
वटवृक्ष-सी छाँव।
9.
दरका मन
चुपके दिल रोया
किया न शोर,
कहकर क्या होना
जगहँसाई होना।
10.
अपार पीड़ा
दुःख बाँटें किससे
सगों ने छला,
रिश्ते हैं बनावटी
पर होगा निभाना।
11.
यक़ीन टूटा
बच्चे जैसा ये मन
छटपटाता
किससे बाँटें दुःख
स्वयं से अब रूठा।
12.
बेचारा मन
घुट-घुटके जीता
बेवफ़ा रिश्ता,
नियति का मज़ाक़
अब मन समझा।
13.
व्यथा की अग्नि
तिल-तिल जलाती
आस जो मिटी,
भस्म होके भी मन
अपनों को ताकता।
14.
मिटी उम्मीद
अमावस की रात
नहीं बीतती,
कोई तो हो उपाय
नन्हा दीया जलाएँ।
15.
प्रेम समाप्त
जीवन पतझर
मन उजड़ा,
आके ठहर गया
पतझर मौसम।