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मंगलवार, 23 जून 2015

सूचना




        हिन्दी हाइकु से जुड़े सभी साथी अपने हैं, अपने परिवार के हैं।फिर भी कुछ साथी समय-समय पर कुछ ऐसा कर जाते हैं , जो दु:ख का कारण बनता है। हमारे एक साथी ने अपने संग्रह की  भूमिका में बिना नामोल्लेख के अगस्त 2012 में प्रकाशित हमारे सेदोका -संग्रहअलसाई चाँदनी से लगभग 13 पंक्तियाँ ज्यों की त्यों उतार लीं ।यही नहीं ऊपर की पंक्तियाँ भी डॉ भगवत शरण अग्रवाल जी के हाइकु -काव्य विश्वकोश से इसी तरह उतार कर एक पृष्ठ पूरा कर लिया ।
    यह अशोभनीय कार्य है । यहाँ उनके नाम का उल्लेख ज़रूरी नहीं।उन्हें हम हिन्दी हाइकु और त्रिवेणी से हटा रहे  हैं। हमारे विरोध करने पर उन्होंने अपना माफ़ीनामा भेजा है। यदि किसी के कथन का कहीं उल्लेख करते हैं, तो नाम देने में क्या लज्जा !








शनिवार, 7 सितंबर 2013

सेदोका की यात्रा

अभी तक उपलब्ध  जानकारी के अनुसार डॉ महावीर सिंह जी के 11 सेदोका मन की पीड़ासंग्रह में 2001 में  तथा सात सेदोका प्यार के बोल’ (2002)में प्रकाशित हुए  थे। त्रिवेणी ने 10 जुलाई,2012 से ( भारतीय समय के अनुसार  9 जुलाई,2013)सेदोका का प्रकाशन शुरू किया । डॉ हरदीप सन्धु त्रिवेणी की मुख्य सम्पादक हैं । आपके सेदोका पहले से तैयार थे,  फिर भी अपने सेदोका  कुछ साथियों के बाद में देने का निश्चय किया। 13जुलाई को डॉ सुधा गुप्ता जी की प्रेरणा से  डॉ भावना कुँअर   डॉ हरदीप सन्धु और हिमांशु ने   सेदोका संग्रह निकालने का निश्चय कियाडॉ उर्मिला अग्रवाल अपने संग्रह की पाण्डुलिपि तैयार कर रही थीं । फोन करके इनके कुछ सेदोका मँगवाए गए। इसी तरह सेदोका  लिखने का आग्रह डॉ मिथिलेश दीक्षित जी से कई बार  किया था  । आपने 17 जुलाई को टाइप कराकर 20 सेदोका  ई-मेल से भेजे, जिनमें से पहले सात हमने त्रिवेणी पर 23 जुलाई को पोस्ट किए । जो टाइप नहीं करा सकी थीं , वे आठ सेदोका आपने  23 जुलाई को फोन पर  हिमांशु को लिखवा दिए , जिनमें से 6 सेदोका ( +20 ई मेल से आए) हमने प्रथम सम्पादित सेदोका -संग्रह ‘अलसाई चाँदनी’ में शामिल किए हैं। अगस्त में देवेन्द्र कुमार दास ( ये कुछ साल पहले सेदोका लिख चुके थे जो  पाण्डुलिपि के रूप में डॉ सुधा गुप्ता जी के पास थे  ),मुमताज टी एच खान के सेदोका मिले ,जिन्हें  4 अगस्त 2012 की पोस्ट में पढ़ा जा सकता है। फिर तो यह कारवाँ आगे बढ़ता गया , जिसमें शशि पाधा भी शामिल हो गई। इस ऐतिहासिक तथ्य की जानकारी हमारे पाठकों और रचनाकारों को होनी चाहिए । हमें इस बात की प्रसन्नता है कि हमारे बहुत सारे साथियों ने सेदोका -रचना में रुचि ही नहीं  दिखाई ,वरन् गुणात्मक सृजन भी किया। हमारे लिए अच्छी  रचना महत्त्वपूर्ण है, नए पुराने रचनाकार होने का कोई महत्त्व नहीं। यह सम्भव है कि कुछ महत्त्वाकांक्षी लोग स्वयं को पुराने सिद्ध करने के फेर में इस इतिहास को झुठलाने का प्रयास कर रहे होंगे।प्रकाशित रूप में डॉ उर्मिला अग्रवाल का संग्रह ‘बुलाता है कदम्ब’ प्रथम एकल संग्रह है। सभी रचनाकारों के आभार के साथ हम त्रिवेणी के  ये लिंक भेज रहे हैं -
10 जुलाई-2012-
डॉ सुधा गुप्ता, रामेश्वर काम्बोजहिमांशु’ ,डॉ भावना कुँअर,
डॉ ज्योत्स्ना शर्मा,सुशीला शिवराण
डॉ ज्योत्स्ना शर्मा,सुशीला शिवराण
11 जुलाई -12 -तुहिना रंजन ,डॉ सरस्वती माथुर
13 जुलाई-12-डॉ जेन्नी शबनम
14 जुलाई-12-डॉ हरदीप कौर सन्धु, डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
16 जुलाई-12- रचना श्रीवास्तव ,
17 जुलाई-12-डॉ उर्मिला अग्रवाल, डॉ महावीर सिंह
22 जुलाई-12-डॉ अनीता कपूर, कमला निखुर्पा ,कृष्णा वर्मा ( रिचमन्ड हिल)
23- जुलाई -12-मिथिलेश दीक्षित
4 अगस्त -देवेन्द्र  कुमार दास,
4-अगस्त-12-मुमताज टीएच खान
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सम्पादक द्वय

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