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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

922



1-सेदोका
कृष्णा वर्मा
1
नई उम्रों की
देख ख़ुदमुख्तारी
रुष्ट हो गए राम
कतरे पर
ताले उड़ान पर
लो भुगतो अंजाम।
2
कोरोना काल
भक्ष रहा बंदों को
क़ायनात बेहाल
मन हैरान
आलमी  ज़ाब का
कैसे होगा  निदान।
3
टोह न चाप
भोंका कोरोना का
खंजर चुपचाप
मिले सबक़
मूरख बंदे तुझे
चली वक़्त ने चाल।
4
कैसी बीमारी
किसी से भी मिले तो
ज़ा मिलेगी भारी
की जो कोताही
लील लेगा विषाणु
मचाएगा तबाही।
5
कहो कोरोना
कब तक रहेगा
सितम ये तुम्हारा
क्षमा दान दो
बख़्शो इस जग को
अहसान करदो
6
बाँधा स्त्री को
सीमित कीं सीमाएं
तुम कैसे अंजान
परिधि-घिरी
अविरल विशाल
छोड़ो बुनना जाल।
7
सब्ज़ पत्तों पे
मौसम का क़हर
ज़र्द दोपहरियाँ
तपे पहर
पी रहीं उदासियाँ
जुदाई का ज़हर।
8
अंजाम नहीं
होता बेकरारी का
फिर भी बेकरार
इंसा बहता
अपनी रवानी में
दरिया रवानी- सा।
9
सह न पाया
तुम से मिली ईर्ष्या
नफ़रत दुत्कार
लौटा रहा हूँ
शब्दों में पिरोकर
लय- तुक के साथ।
-0-
2-ताँका
अर्चना राय
1
मन-विहग
विचरे अविराम
अनंत चाह
उत्कंठित ढूँढता
गूढ़-सा ब्रह्म ज्ञान। 
-0-