गुरुवार, 4 जून 2026

1222-नौतपा दैत्य

डॉ. जेन्नी शबनम


1.
नौतपा दैत्य
किसी को न छोड़ेगा
बचके रहो
घर में छुप जाओ
पानी पी के भगाओ।
2.
होगा बचना
सूरज बना आग
सब हैं डरे
कैसे करें उपाय
ग़रीब असहाय।
3.
जीव बेचैन
गर्मी से हैं बेहाल
बिजली गुल
घमण्डी बना सूर्य
रौद्र रूप दिखाए।
4.
हवा है शांत
बैठी है समाधिस्थ
धूप से जली
समाधि नहीं टूटी
हवा बनी है संत।
5.
हरता प्राण
सूर्य है मृत्यु-देव
नहीं बख़्शता
जीव-जंतु या नदी
पोखर या बावड़ी।
6.
जेठ महीना
बड़ा है तड़पाता
वह निगोड़ा
खुलेआम घूमता
जीव-जंतु छुपते
7.
सूर्य बेशर्म
ज़रा नहीं है शर्म
लू का गोला
फेंकके ख़ुश होता
चोटिल है दुनिया।
8.
नौतपा शत्रु
लू लेकर दौड़ता
चुनौती देता,
छाता-पानी हारते
जीव-जंतु हाँफते
9.
ओह गरमी
ज़रा करो नरमी
जीव बेहाल
जिसका नहीं घर
उसकी पीड़ा हर।
10.
आषाढ़ आओ
जेठ है तड़पाए
नीर बहाओ
सूर्य को समझाओ
ठण्डक को लौटाओ।
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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

1221

 बैसाखी

ऋता शेखर ‘मधु’

1

पावन है बैसाखी

स्वर्णिम फसलों पर

गाते मधुरिम पाखी।

2

होती आज कटाई

खेतों बीच रबी 

कृषकों को है भायी।

3

बाली जब लहराई

चहका घर आँगन

चुनरी भी घर आई।

4

पायल जब- जब बाजे

गिद्धा बन डोले

बल्ले-बल्ले साजे।

5

खेतों में हरियाली

जगती बैसाखी

फसलें हैं मतवाली।

6

दूर परिंदा गाए

हर्षित  दुल्हन ने

कंगन भी झनकाए।

7

पीपल की छाँव तले

नर्तन की धुन पर

ढोलक की थाप चले।

8

आमों में बौर लगे

कोयलिया कूकी

महुआ के दौर सजे।