1-कमल कपूर
1
ब्रह्मा कि है
ये
सर्वश्रेष्ठ
रचना
धवल रूप
ज्यों सुबह की
धूप
संजीवनी-सी
बेटी।
2
हो बेखबर
अपने भविष्य से
इतरा रही
उड़ती फिर रही
तितली-सी लड़की।
3
नर्म ख़्लाब
बुनती
नन्हे नैनों
में
कपास-कुसुम सी
मुलायम लड़की।
4
मंज़िल दूर
हो दुश्वार डगर
नहीं मुश्किल
साथ चले अगर
प्यारा हमसफ़र।
5
नभ- पटल
और नदी-नीर को
रंग नील में
देती नित
प्रकृति
ये नीलाभ
नज़ारे।
6
पथ एकाकी
मौसम अनुकूल
या प्रतिकूल
बढ़ लक्ष्य की
ओर
थाम आशा कि डोर।
7
उड़े
हो धुआँ
गुज़रे काले कल
नदी किनारे
बैठे जो चार पल
गगन की छाँव में।
8
माँ - जैसी धरा
पिता-सा आसमान
जुटाते सतत
जीवन का सामान
है ज़िन्दगी आसान।
9
चिरैया बन
उड़ने को तत्पर
अनवरत
खोजे मुक्त गगन
ये अलबेला मन।
10
गुज़रे काले कल
नदी किनारे
बैठे जो चार पल
गगन की छाँव में।
8
माँ - जैसी धरा
पिता-सा आसमान
जुटाते सतत
जीवन का सामान
है ज़िन्दगी आसान।
9
चिरैया बन
उड़ने को तत्पर
अनवरत
खोजे मुक्त गगन
ये अलबेला मन।
10
फैला साँझ का
सुनहरा आँचल
रँगेगी रात
इसे स्याह रंग में
टाँकेगी चाँद-तारे।
11
-0-कमल कपूर, 2144 / 9, फ़रीदाबाद-121006 हरियाणा
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