रविवार, 17 मार्च 2019

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रमेश कुमार सोनी
1
रोने–हँसाने
जब कोई ना आता
आती है यादें
जनाज़े तक जाती
सुख–दुःख सहेली
2
पत्थर सहे
तराशने का दर्द
मूर्ति हो गया
पीड़ा सुनता रहा
पुनः पत्थर हुआ
3
ख़ुशी गुम थी
मिलता रहा गम
मेलों में  ढूँढा
युगों बीत गए हैं
मैं खुद खोने लगा
4
रोने की अदा
खुश्क रहा दामन
एक फ़साना
दिल में रक्त अश्रु
दिखे तो कैसे दिखे ?
5
युगों से प्यासा
समुद्र बन दौड़ा
अश्रु का घोड़ा
कंठ सूखता गया
प्यार बढ़ता गया
6
श्मशान हुए
ख्वाबों की लाश पाले
भूत-सा फिरा
वो फूल चढ़ा ग
मोक्ष दिया , शुक्रिया ।
7
मिट्टी का जिस्म
दुखों के मेघ दौड़े
शान से बिछे
प्यार के दूब हँसे
बगीचे खिल उठे ।
 8
घटे दायरे
अकेलों की दुनिया
वीरानी डसे
यहाँ–वहाँ भटका
ख़ामोशी लिए लौटा
9
आँधी रो है
रातें हाथ मलतीं 
लहू का दिया
बुझा न पा कभी
दिल जला रखा था
10
रिश्तों की जीभ
मरणासन्न पिता
चुए–टपके
वसीयत हो रही
मरे तो माल बाँटें

..........-0-
रमेश कुमार सोनी
जे.पी. रोड – बसना जिला – महासमुंद , छत्तीसगढ़ , 493554
Mob. – 7049355476 / 9424220209

20 टिप्‍पणियां:

Sudershan Ratnakar ने कहा…

सभी ताँका बहुत सुंदर।बधाई

अनिता मंडा ने कहा…

तल्खियाँ समेटे सुंदर ताँका।

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

प्रत्येक ताँका अपने मे तीक्ष्ण व्यंजना समाहित किये है,बिम्ब प्रभावी है,उनका अभिनव प्रयोग तीक्षणता को उभरता है,बधाई
रमेश कुमार सोनी जी।

Shiam ने कहा…

प्रिय रमेश सोनी जी ,
बहुत ही हृदय विदारक विचार आपने इस टाँके के माध्यम से प्रस्तुत किया है | आपके व्यक्तित्व की सवेदनशीलता झलकती है | अंग्रेज़ी कवि शैली की एक पंक्ति याद आ " our sweetest songs are those that tell the saddest thoughts. P.B Shelley . Shiam Hindi Chetna

Dr. Purva Sharma ने कहा…

निःशब्द हूँ मैं ....
बहुत संवेदनात्मक अभिव्यक्ति ....

Krishna ने कहा…

सभी ताँका लाजवाब...बहुत बधाई।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

धन्यवाद जी ।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

बहुत शुक्रिया जी ।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

सादर अभिवादन , धन्यवाद ।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया । आभार ।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

आपका आभार ।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

धन्यवाद ।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Ramesh Kumar Soni ने कहा…

आपका आभार ।

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण ताँका!
हार्दिक बधाई आ. रमेश जी!

~सादर
अनिता ललित

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

आदरणीय रमेश जी बहुत समय बाद तांका पढने को मिले |बहुत सुन्दर सृजन है हार्दिक बधाई स्वीकारें |

अनाम ने कहा…

युगों से प्यासा
समुद्र बन दौड़ा
अश्रु का घोड़ा
कंठ सूखता गया
प्यार बढ़ता गया ।
bahut khoob tanka
badhayi
rachana

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

सादर आभार ।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

सविता जी
इस बार ताँका लिखने का मन हुआ । कभी कभी विचार हाइकु में नही समाते ।
आपको रचनाएँ अच्छी लगी , सादर आभार ।
रमेश कुमार सोनी बसना

kashmiri lal chawla ने कहा…

बढिया