रविवार, 11 मार्च 2018

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अकल्पनीय

वक्त कब हमारे लिये क्या लेकर आ खड़ा होगा कोई नहीं जानता ।वह कभी कभी आनंद भरे अनमोल क्षण हमारी झोली में ऐसे भी डाल देता है जो हमेशा के लिये हमारे मन में घर बना लेते हैं । हम व्यर्थ ही उसे कोसते रहते हैं ।वह जब जो देता है उसका आनंद ही नहीं लेते ।किसी के दो मधुर बोल जब हमारे कानों से होकर दिल में उतरते हैं तो वे केवल बोल नहीं होते बल्कि बोलने वाले की रूह भी जैसे हमारे मन में आकर हमारी रूह से अपना अटूट रिश्ता बना लेती है सदा सदा के लिये ।
उसके साथ मेरा लगाव भी कुछ ऐसा ही है ।वक्त ने घुमा फिरा कर जाने किस गली से कहाँ से लाकर हमारी रूहों का गठबँधन करा दिया । उससे अपनी बात न मैं कहे बिना रह पाती हूँ और न वह । उस दिन अचानक मेरे फोन की घंटी टन टना उठी ।मैं चेक करने लगी यह नया नम्बर किस का है ।पता न चलने पर भी मैं आदतन बोल पड़ी ,"हैलो , जी कौन ?”
“पहचाना ? “ उधर से खुशी से भरी , शरबत घुली आबाज आई ।
उसने मुझ से फोन द्वारा बात करने का जुगाड़ कर ही लिया मुझे हैरानी में डालने के लिये ।
“क्या आप हैं मेरी मानस सखि ?  जिससे मैं रोज बात करती हूँ मन ही मन में ।”
“और कौन हो सकता है ?” वह खिलखिलाती हुई कहने लगी ,"मेरा सरप्राइज कैसा लगा ? “
“हैरान करने वाला और मूल्यवान भी।आज यह क्या सूझा ? हम रोज ही तो बात करते हैं न ! कोई बहुत जरूरी बात थी क्या तुरन्त कहने को ? "
“अपनी एक खुशी तुझ संग शेयर करनी थी ।तेरे समय निकालने तक का  इंतजार नहीं हो रहा था ।” वह चहक रही थी , छोटी बच्ची की तरह , “रिजल्ट आ गया है । बिटिया सेलेक्ट हो गई ।”
“ओ गुड ! मुबारक हो । भला सेलेक्ट कैसे न होती । बेटी किसकी है ।हर क्लास में प्रथम आने वाली मम्मी की बेटी होकर क्या वह कामयाब न होती !”
इस रिजल्ट के लिए हम दोनों ने बड़ी बेसब्री से इन्तजार किया था । 
ढेर  सारी प्रार्थनायों और अरदासों के साथ ।एक दूसरे को बधाई दे कर हमने यह पल सेलीब्रेट किया ।एक दूसरे का मुँह मीठा कराने के लिये अपनी माँगे भी रख दी । क्या सुहाना पल था वह ।
यूँ लिखित बात करने का हमारा रोज का समय तय था । लेकिन बोलकर बात करने का एक दूसरे की आवाज को सुनने का यह पहला अवसर था। मैं तो कोई बात ही न कर पाई । उसी ने बात की ।वह अपनी खुशी मेरे साथ शेयर करके हवा के सुगंधित झोंके की तरह आई और चली गई । मेरे कानों को उस की खुशी से लबालव भरी खनकती हँसी की गूँज अभी तक सुनाई पड़ रही है ।उसके शब्दों से छलकता मिश्री घुला मधुर रस मेरे रोम रोम को आनंदित कर रहा है ।उसका मिलन जन्म जनमान्तरों के बंधन ताजा कराने वाला लगा । यह भी लगा हम नव जन्म लेकर अपने पूर्व जन्म के प्यारे से मिल रहें हैं । जैसे वक्त ने संसार सागर से उछाल कर उसके प्यार का मूल्यवान मोती अनायास मेरी मन की हथेली पर धर दिया हो । मैं अचम्भित सी देख रही हूँ । उस से बात कर के मिली खुशी मन से उछल उछल पड़ रही है -

न्यारा बंधन
जुड़ा आन मुझसे
प्यार जन्मों का ।


कमला  घटाऔरा 

10 टिप्‍पणियां:

अनिता मंडा ने कहा…

सुखद अहसास ख़ुश्बू की तरह जीवन को महका देते हैं। वाह!

Vibha Rashmi ने कहा…

कमला जी एक बार में पढ़ गई , मन के बहुत भीतर से बड़े नाज़ुक अहसासों को शब्दों में पिरोया है । जीवन के ये अहसास जब भावों में लिपटे भाषा पा जाते हैं तो जन्म सार्थक हो जाता है । बधाई आपको ।

सविता मिश्रा 'अक्षजा' ने कहा…

सुखद अनुभूति😊🙏

Krishna ने कहा…


बहुत सुंदर अनुभूति...बहुत बधाई कमला जी।

bhawna ने कहा…

कोमल अनुभूति की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। बधाई कमला जी।

भावना सक्सैना

Unknown ने कहा…

मन को सुगन्धित करती भावों की खुशबू ..सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बधाई कमला जी ।🌸🌸🌸🌸

ज्योति-कलश ने कहा…

सुखद अहसास लिए सुन्दर प्रस्तुति !
हार्दिक बधाई !!

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

मन के रिश्ते ऐसे ही तो मीठे होते हैं | इस प्यारे से रिश्ते को ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ आपको भी बहुत बहुत बधाई...|

Jyotsana pradeep ने कहा…

मन के रिश्तों की बात ही निराली है कमला जी।
मीठे और अनूठे रिश्ते के इस प्यारे अहसास के लिए हार्दिक बधाई !

Unknown ने कहा…

सभी प्यारे पाठको आप सब का बहुत बहुत धन्यबाद मेरी रचना पढ़ने के लिये । सब की टिप्पणियों से मन निर्मल नि:स्वार्थ प्रेम से भरा ही नही यह प्रेमानूभूति और गहरी हो गई ।जीवन में कोई कोई इन्सान इतना प्रेम से भरा होता है कि वह किसी के पास से भी गुजर जाये तो आनंद की अनुभूति करा जाता है ।