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गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

सपनो में रंग भरो

1-शशि पुरवार
1
तपती  है  जब धरती
बदली ना बरसी
वो छिन- छिन है मरती ।
2
सपनो में रंग भरो
नैना  सजल हुए
जितने भी जतन करो।
3
माँ जैसी बन जाऊँ
छाया हूँ उनकी
उन तक न पहुँच पाऊँ।
4
सब भूल रहे बतियाँ
किसको बतलाएँ
कैसे बीतीं रतियाँ ।
5
फिर डाली ने पहने
रंग भरे नाजुक
ये फूलो के गहने .
6
डाली -डाली  महकी,
भौरों की गुंजन,
क्यों चिड़िया ना चहकी।
-0-
2-हरकीरत हीर
1
ये रिश्ते ठहरे से
देकर घाव गए
उम्रों के गहरे से ।
2
जो छूट  गए थे कल
खोज रही हूँ फिर
रब्बा! प्यारे वो पल ।
-0-
3-कविता मालवीय 
1
आई तेरी पाती 
बार-बार साँकल 
पुरवैया खड़काती
2
रख लो मन को ख़ाली  
यादों का भाड़ा 
दे देगी कंगाली  
-0-