शनिवार, 3 अगस्त 2019

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डॉoसुधा गुप्ता
1
चित ; ज्योत्स्ना प्रदीप की माताश्री
बाँस की पोरी
निकम्मी खोखल मैं
बेसुरी, कोरी
तूने फूँक जो भरी
बन गई बाँसुरी
2
तेरा ही जादू
दूध पीना भूला है
गैया का छौना
चित्र-से मोर, शुक
कैसा ये किया टोना


3
मिली झलक
लगी नहीं पलक
रूप सलोना
श्याम ने किया टोना
राधिका भूली सोना
4
बाँस कि पोरी
बनी रे मुरलिका
श्याम दीवानी
राधिका रो-रो मरे
चुराए, छिपा धरे
5
कान्हा क्या गए
राधा हुई बावरी
कैसी विकल
सदा गीला आँचल
सूखे न किसी पल
6
ज्वर से तपे
जंगल के पैताने
आ बैठी धूप
प्यासा बेचैन रोगी
दो बूँद पानी नहीं।
7
अपने भार
झुका हरसिंगार
फूलों का बोझ
उठाए नहीं बने
खिले इतने घने
8
पाँत में खड़े
गुलमोहर सजे
हरी पोशाक
चोटी में गूँथे फूल
छात्राएँ चलीं स्कूल
9
सुन रे बच्चे
सपने तेरे बड़े
नयन छोटे
आकाश तेरा घर
ले उड़ान जीभर
10
सुख का साथी
घर-परिवार
दु:ख का साथी
सिर्फ़ अकेलापन
किसे खोजे पागल
11
अकेली चली
दु:खों के दरिया में
आँसू की कश्ती
खुद ही मँझधार
खुद ही पतवार
-0-

7 टिप्‍पणियां:

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

सुधा जी आपकी रचना बड़ी मनमोहक है और ज्योत्स्ना जी की माता जी के सुन्दर चित्र ने तो चार चाँद लगा दिऐ!!

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

आदरणीया सुधा जी के ताँके सुंदर हैं , हम सबका सदैव से मार्गदर्शन करते हैं ।
रमेश कुमार सोनी , बसना , छत्तीसगढ़

डाॅ कुँवर दिनेश (शिमला) ने कहा…

बहुत सुंदर, भावपूर्ण ताँके! आदरणीया सुधा जी को साधुवाद!

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर,प्रत्येक ताँका रस एवम भाव से पूर्ण।आदरणीय सुधा जी की लेखनी को नमन

Sudershan Ratnakar ने कहा…

आ.सुधा जी के सभी ताँका बहुत सुंदर,मनमोहक, भावपूर्ण हैं।
ज्योत्सना प्रदीप जी की माताजी की पेंटिंग अति सुंदर।

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

सुधा जी बहुत सुंदर चित्रण किया है तांका में बांसुरी का |हार्दिक बधाई |

Jyotsana pradeep ने कहा…


आ.सुधा जी के सभी ताँका बहुत सुंदर तथा भावपूर्ण हैं।
सादर नमन है उनकी लेखनी को....
मेरी माँ की पेंटिंग के लिए बहुत-बहुत आभार!!