शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

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 बैसाखी

ऋता शेखर ‘मधु’

1

पावन है बैसाखी

स्वर्णिम फसलों पर

गाते मधुरिम पाखी।

2

होती आज कटाई

खेतों बीच रबी 

कृषकों को है भायी।

3

बाली जब लहराई

चहका घर आँगन

चुनरी भी घर आई।

4

पायल जब- जब बाजे

गिद्धा बन डोले

बल्ले-बल्ले साजे।

5

खेतों में हरियाली

जगती बैसाखी

फसलें हैं मतवाली।

6

दूर परिंदा गाए

हर्षित  दुल्हन ने

कंगन भी झनकाए।

7

पीपल की छाँव तले

नर्तन की धुन पर

ढोलक की थाप चले।

8

आमों में बौर लगे

कोयलिया कूकी

महुआ के दौर सजे।

8 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

ऋता शेखर मधु जी के माहिया कल पढ़कर टिप्पणी पोस्ट की।पर टिप्पणी पोस्ट नहीं हो पाई थी। बैसाखी पर उनका सुंदर माहिया सृजन। हार्दिक बधाई।
विभा रश्मि

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत सुंदर माहिया,हार्दिक बधाई आपको।

Krishna ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन...हार्दिक बधाई ऋता शेखर जी।

Rashmi sanjay ने कहा…

बहुत सुन्दर सृजन

बेनामी ने कहा…

दृश्य आँखों के सामने उपस्थित करने वाले सुन्दर माहिया की बधाई!!!
शीला मिश्रा, भोपाल।

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

पटल पर मेरे माहिया को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार 🙏

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

आदरणीया विभा रश्मि जी, प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार !!

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

आदरणीया सुरंगमा जी, प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार !!