1221
बैसाखी
ऋता शेखर ‘मधु’
1
पावन है बैसाखी
स्वर्णिम फसलों पर
गाते मधुरिम पाखी।
2
होती आज कटाई
खेतों बीच रबी
कृषकों को है भायी।
3
बाली जब लहराई
चहका घर आँगन
चुनरी भी घर आई।
4
पायल जब- जब बाजे
गिद्धा बन डोले
बल्ले-बल्ले साजे।
5
खेतों में हरियाली
जगती बैसाखी
फसलें हैं मतवाली।
6
दूर परिंदा गाए
हर्षित दुल्हन ने
कंगन भी झनकाए।
7
पीपल की छाँव तले
नर्तन की धुन पर
ढोलक की थाप चले।
8
आमों में बौर लगे
कोयलिया कूकी
महुआ के दौर सजे।
16 टिप्पणियां:
ऋता शेखर मधु जी के माहिया कल पढ़कर टिप्पणी पोस्ट की।पर टिप्पणी पोस्ट नहीं हो पाई थी। बैसाखी पर उनका सुंदर माहिया सृजन। हार्दिक बधाई।
विभा रश्मि
बहुत सुंदर माहिया,हार्दिक बधाई आपको।
बहुत सुंदर सृजन...हार्दिक बधाई ऋता शेखर जी।
बहुत सुन्दर सृजन
दृश्य आँखों के सामने उपस्थित करने वाले सुन्दर माहिया की बधाई!!!
शीला मिश्रा, भोपाल।
पटल पर मेरे माहिया को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार 🙏
आदरणीया विभा रश्मि जी, प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार !!
आदरणीया सुरंगमा जी, प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार !!
आदरणीया रश्मि जी, हार्दिक आभार !!
आदरणीया शीला जी, उत्साहवर्द्धक टिप्पणी हेतु हार्दिक आभार !!
सजीव चित्रण प्रस्तुत करते बहुत सुंदर माहिया सृजन।हार्दिक बधाई ऋताशेखर जी। सुदर्शन रत्नाकर
बहुत सुन्दर माहिया।
हार्दिक बधाई आदरणीया।
सादर
बहुत सुंदर माहिया रचे है आपने!!
बहुत सुंदर माहिया!
~सादर
अनिता ललित
सुन्दर सृजन... 🌹🌹🌹
आपने बैसाखी की खुशी, खेतों की हरियाली और लोगों की उमंग को बहुत प्यारे तरीके से पकड़ लिया। मुझे खास बात ये लगी कि आपने छोटे-छोटे दृश्यों से बड़ा सुंदर चित्र बना दिया। हर stanza में अलग सा रंग दिखा, लेकिन सब मिलकर एक ही खुशी को दिखाते हैं।
एक टिप्पणी भेजें