सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

1230-चोका

 रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

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अंकुर बनकर / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

अक्षय प्रेम-जल / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

अब जाल समेटो / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

अभिशप्त अप्सरा / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

अशान्त मन ! / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

आँखें पोंछ लो / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

आँसू जो पोंछे / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

आए नोचने / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

आओ करें तर्पण / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

उजड़ा सुहाग है / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

उमड़ी आँधी ! / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

ओ मेरी संजीवनी ! / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

ओट हाथ की / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

कहो किसकी भूल ! / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

काँटे ही काँटे / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

गीले आखर / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

घना है वन / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

चन्दन वन / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

चलने की बेला है / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

चूमा था भाल / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

जीवन जिया / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

डोर चाँदनी / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

तरु बिलखा / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

नदिया तीरे / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

परिभाषा से परे / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

पाई छुअन / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

पिंजरे में चिड़िया / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

प्रथम ग्रास / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

प्राणों की डोर / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

लिखा जो शिलालेख / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

साँझ हो गई / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

सूखी नदियाँ / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’


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