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शनिवार, 1 जून 2019

865


1-ताँका-सुदर्शन रत्नाकर
1
एक चिड़िया
उड़ती आकाश में
गीत सुनाती
ऊँचाइयाँ है छूती
इधर से उधर।
2
सुबह होती
 चिड़िया चहकती
मन मोहती
वातावरण देखो
प्रकृति सँवारती ।
3
लगा है मेला
तारों संग निकला
चाँद सलोना
रात भर चमके
भोर ओझल हुए।
4
लो आ गई है
चूनर ओढ़े रात
सितारों वाली
चंदा रहेगा साथ
होने तक प्रभात।
5
चाँद आते हो
गोधूलि ख़त्म होते
तारों के संग
यामिनी को मनाने
गगन को सजाने।
6
चाँद आया था
उजियारा लेकर
मेरे आँगन
पर मैं सोती रही
बंद किए खिड़की।
7
बाल रश्मियाँ
फैलीं जो धरा पर
बजी घंटियाँ
थिरका झील-नीर
स्वागत विहान का।
8
सोया था कल
नभ के आग़ोश में
सिमटकर
सूर्य जगा है आज
धरा जो मुस्काई है।
9
विभिन्न रूप
विभिन्न आकृतियाँ
कैसे लाते हो
सावन में बादल
रंग अनेक तुम।
10
उड़ी आ रही
बादलों की पालकी
बैठी दुल्हन
वर्षा-शृंगार किए
धरती से मिलने।
11
कोसी धूप में
अलसाई दूब पे
चार क़दम
चलें हम साथ में
रास्ता कट जाएगा।
12
सोने -सा रूप
आँगन की धूप का
छुईमुई -सी
शर्माती उतरी है
सिमटी है बाहों में।
13
हो गया शुरू
धरती का उत्सव
हुई जो वर्षा
नहाई है प्रकृति
चहक उठे पक्षी।
14
सोई है धरा
ओढ़ चूनर नीली
आसमान की
चाँद -सितारों वाली
सूरज जगाएगा ।
15
नेह की बूँदे
बरसती आँगन
आता सावन
बजती सरगम
गाते पिक भ्रमर।
-0-
( नई लेखनी)
2-सेदोका -2-नीरू देवी

 जब कभी मैं
 पुकारता हूँ तुम्हें
 चले आते हो तुम
 मन - मंदिर
 जहाँ भी देखूँ उसे
 र आता साथ।
   -0-