गुरुवार, 8 सितंबर 2016

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1-कृष्णा वर्मा
1
यादों की गहन झड़ी
ढलकें ना आँसू
पलकें ले बोझ खड़ीं।
2
अहसास हुए गीले
जुगनू- सी दमकीं
यादों की कंदीलें।
3
दिल बाँचे यादों को
काँधे तरस गए
अपनों के हाथों को।
4
कैसा जादू डाला
मीठी सुधियों में
डूबा जीवन प्याला।
5
उलझी जीवन- पाँखें
भूल गई आँसू
गुमसुम भीगी आँखें।
6
आँगन से धूप ढली
यादों के द्वारे
बाती हर बार जली।
-0-

2-भुट्टा और ज़िन्दगी-प्रियंका गुप्ता
भुट्टे के जैसी
होती है ज़िन्दगी भी
कभी कड़क
तो कभी नर्म, मीठी
वक़्त की आँच
इसे भूना करती
नमक-मिर्च
दुनिया लगा देती
अब यह तो
हम तय करते
खाना है इसे
स्वाद लेकर; या तो
फ़ेंक देना है
दूर किसी कोने में
भुट्टा ज्यों पके
खाने लायक बने
वैसे ही मानो
ज़िन्दगी पकी -भुनी
हर हाल में
जीने लायक बनी
खुश रहना
हमें सिखला जाती
राह दिखला जाती।
-0-

16 टिप्‍पणियां:

Vibha Rashmi ने कहा…

शुभ प्रभात! कृष्णा वर्मा जी के आँसू भीगे माहिया मर्मस्पर्शी हैं । सभी एक से बढ़कर एक । बधाई ।
प्रियंका जी के चौका भुट्टा और ज़िंदगी बहुत सुंदर बने हैं । दोनों की रचनात्मकता सुंदर । बधाई ।

अनिता मंडा ने कहा…

कृष्णा जी भावपूर्ण माहिया लय में सधे हुए बहुत अच्छे हैं, बधाई।
प्रियंका जी जीवन को भुट्टे की खूबसूरत उपमा , वाह!!
बधाई।

Sudershan Ratnakar ने कहा…

कृष्णाजी यादों के भीगे भीगे माहिया बहुत सुंदर ।बधाई

Sudershan Ratnakar ने कहा…

जिदंगी पकी-भुनी
हर हाल में
जीने लायक बनी। बहुत सुंदर चोका प्रियंकाजी ।बधाई

Unknown ने कहा…

कृष्णा जी बहुत सुंदर माहिया छंद हार्दिक बधाई ....प्रियंका जी वाह बहुत खूबसूरत रचना ..वक्त की आँच इसे भूना करती ...हार्दिक बधाई

Manju Gupta ने कहा…

गागर में सागर भर दिया . कृष्णा वर्मा जी और प्रियंका जी की रचनाओं ने .
बधाई

Krishna ने कहा…

बेहद सुन्दर चोका। भुट्टे सा जीवन बहुत बढ़िया उपमा दी प्रियंका जी... बहुत बधाई!

Unknown ने कहा…

कृषणा वर्मा जी बहुत सुन्दर माहिया पहला और छटा बहुत अच्छा लगा ।बधाई ।
प्रियंका गुप्ता जी भुट्टे से जीवन की तुलना खूब जँची । कभी कभी किसी भी वस्तु पर हमारी कल्पना ठहर जाये तो कुछ न कुछ अद्भुत रचना बन जाती । बधाई ।

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

कृष्णा जी यादों के अनेक रूप दर्शाते माहिया हैं |प्रियंका जी आपने भी जीवन को भुट्टे से तुलना कर इसकी एक और परिभाषा रच दी है आपदोनो को हार्दिक बधाई |

Dr.Purnima Rai ने कहा…

कृष्णा जी उम्दा भावों से सजे माहिया ..बधाई..
दमकी दमकीं
खड़ी खड़ी....अनुस्वार अनावश्यक लगा मुझे

Dr.Purnima Rai ने कहा…

कृष्णा जी उम्दा भावों से सजे माहिया ..बधाई..
दमकी दमकीं
खड़ी खड़ी....अनुस्वार अनावश्यक लगा मुझे

Dr.Purnima Rai ने कहा…

प्रियंका जी..चौका खूबसूरत ..जिंदगी की तरह....

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

आप सभी का दिल से बहुत बहुत आभार इस तरह उत्साह बढाने के लिए...|
कृष्णा जी, आपके माहिया बेहद खूबसूरत हैं...| मेरे हार्दिक बधाई...|

Jyotsana pradeep ने कहा…

आदरणीय कृष्णा जी बहुत सुंदर माहिया हैं -
बहुत अच्छा लगा -

आँगन से धूप ढली
यादों के द्वारे
बाती हर बार जली।

.प्रियंका जी वाह बहुत खूबसूरत रचना ..
वक्त की आँच इसे भूना करती ...
हार्दिक बधाई आप दोनों रचनाकारो को !





rbm ने कहा…

कृष्णा जी आपके द्वारा रचे सभी माहिया तथा प्रियंका जी का चोका बहुत सुंदर लगे|आप दोनों को बधाई |

पुष्पा मेहरा

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

आ. कृष्णा दीदी, बेहद ख़ूबसूरत, मर्मस्पर्शी माहिया!
प्रियंका जी, भुट्टा और जिंदगी-बहुत बढ़िया प्रस्तुति !
आप दोनों को हार्दिक बधाई !!!

~सादर
अनिता ललित