सोमवार, 28 जनवरी 2019

853-वक़्त


डॉ जेन्नी शबनम

वक्त की गति 
करती निर्धारित  
मन की दशा 
हो मन प्रफुल्लित 
वक़्त भागता
सूर्य की किरणों-सा
मनमौजी-सा
पकड़ में न आता
मन में पीर
अगर बस जाए
बीतता नहीं
वक़्त थम-सा जाता
जैसे जमा हो
हिमालय पे हिम
कठोरता से
पिघलना न चाहे,
वक़्त सजाता
तोहफ़ों से ज़िन्दगी
निर्ममता से
कभी देता है सज़ा
बिना कुसूर
वक़्त है बलवान
उसकी मर्ज़ी
जिधर ले के चले
जाना ही होता
बिना किए सवाल
बिना दिए जवाब!
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9 टिप्‍पणियां:

Sudershan Ratnakar ने कहा…

दार्शनिकता का पुट लिए बहुत सुंदर चोका।

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

बहुत सच्ची बात कही है आपने...| इस बेहतरीन चोका के लिए बहुत बधाई...|

Dr. Purva Sharma ने कहा…

वक्त की महत्ता को बयाँ करता सुंदर चोका... जेन्नी जी बधाई

Krishna ने कहा…

वक़्त की महिमा बताता सुंदर चोका... बधाई जेन्नी जी।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

वक़्त के प्रति मेरी भावना को आप सभी की सराहना मिली, हृदय से आभारी हूँ.

neelaambara ने कहा…

बहुत सुंदर चोका, हार्दिक बधाई।

neelaambara ने कहा…

बहुत सुंदर चोका, हार्दिक बधाई।

kashmiri lal chawla ने कहा…

Best

Jyotsana pradeep ने कहा…


बहुत प्यारा चोका, हार्दिक बधाई जेन्नी जी !