सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

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16 टिप्‍पणियां:

Krishna ने कहा…

बहुत भावपूर्ण ताँका...हार्दिक बधाई भाईसाहब।

पूनम सैनी ने कहा…

बहुत सुन्दर और प्यारी रचना है गुरु जी।💐👌

Rashmi Vibha Tripathi ने कहा…

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण ताँका।
हार्दिक बधाई आदरणीय।

सादर

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

बहुत सुंदर भाव आदरणीय!...आपको अनेकों बधाई!

नीलाम्बरा.com ने कहा…

अति मार्मिक, आपको हार्दिक बधाई

Dr. Purva Sharma ने कहा…

भावपूर्ण .….. विरोधाभास प्रतीत हो रहा

सुंदर सृजन हेतु हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Dr.Mahima Shrivastava ने कहा…

बहुत सार्थक सृजन

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

व्यथित मन और उदात्त प्रेम के भावपूर्ण उद्गार,बहुत सुंदर ताँका।नमन

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बहुत सुंदर, भावपूर्ण अभिव्यक्ति। बधाई आपको

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

सागर की गहराई और मन की चंचलता के साथ नदी । सबकुछ एक साथ गहरे समेटे हुए - बधाई।

सहज साहित्य ने कहा…

आपके अमूल्य शब्दों के लिए अनुगृहीत हूँ।
मेरा सृजन यदि कुछ हैतो वह आपकी प्रेरणा का ही फल है।

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

बहुत ही सुंदर भाव हैं भाई कम्बोज जी। हार्दिक बधाई स्वीकारें।

dr.surangma yadav ने कहा…

सुंदर और भावपूर्ण रचनाएँ।बधाई स्वीकारें

Sushma Chourey ने कहा…

भाव पूर्ण कविता

Pushpa mehra ने कहा…


परोक्ष रूप से कर्तव्य बोध कराने वाले दोनों ही ताँका उद्बोधक हैं |भाई जी आपकी लेखनी को नमन |

पुष्पा मेहरा

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

बहुत ही सुंदर एवं भावपूर्ण ताँका ! सादर नमन आदरणीय भैया जी!

~सादर
अनिता ललित