रविवार, 18 जुलाई 2021

977-रंगों से भरे

 

रंगों से भरे

डॉ. शिवजी श्रीवास्तव

1.

सगुन हुआ

नीलकंठ आ हैं

काला कौआ भी

छत पे काँव करे

आज पिया आएँगे।

2.

दौड़ रहे हैं

नीले नभ के बीच

मृगछौनों- से

काले धूसर मेघ

धरा हो रही हरी।

-0-

 

30 टिप्‍पणियां:

Anita Manda ने कहा…

दोनों ताँका उत्कृष्ट बने हैं। नीलकंठ का दर्शन शुभ माना जाता है। बादल हिरण के बच्चों की तरह चंचल हो कर भाग रहे हैं, सुंदर बिम्ब लिया है।

Rashmi Vibha Tripathi ने कहा…

सुन्दर, उत्कृष्ट भाव से परिपूर्ण ताँका।
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ आदरणीय।

सादर

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

वाह!बहुत सुंदर रचना!नीलकंठ झांसी में खूब दिखा करते थे, और बहुत शुभ माने जाते थे....हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ भैया!!💐

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद अनिता जी

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद रश्मि जी

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद प्रीति जी।

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बहुत सुंदर बिम्ब। उत्कृष्ट ताँका। हार्दिक बधाई

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक आभार दीदी

Dr.Mahima Shrivastava ने कहा…

सुंदर बिम्बों से सुसज्जित रचना।

Kamlanikhurpa@gmail.com ने कहा…

मृग छौने से मेघ बहुत सुंदर भाव । बधाई आदरणीय शिवजी

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक आभार कमला निखुर्पा जी

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद डॉ. महिमा श्रीवास्तव जी।

भीकम सिंह ने कहा…

बेहतरीन, हार्दिक शुभकामनाएँ ।

नीलाम्बरा.com ने कहा…

अति सुंदर भावपूर्ण ताँका।
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ आदरणीय।

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

नीलकंठ अब भी शुभ माने जाते हैं और कौए की मुंडेर पर आवाज़ करना अतिथि बुलाते हैं- अच्छा प्रयोग है। मेघ जो हिरण की तरह हैं और वर्षा से वसुधा को हरी कर रहे हैं सुंदर शब्दांकन- बधाई।

Sushila Sheel Rana ने कहा…

नीलकंठ, कौओं के प्रयोग से काव्य में जीवंतता आ गई है, लोकजीवन का माधुर्य भी सौंदर्य में अभिवृद्धि कर रहा है।
"काले धूसर मेघ
धरा हो रही हरी।"
उपरोक्त पंक्तियों में धूसर मेघों का धरा को हरी करना भी, रंगों के विरोधाभास से काव्य को मनोहारी बनाता है।
उत्कृष्ट सृजन हेतु डॉ शिवजी को बधाई

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

Upma ने कहा…

बहुत सुंदर

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत सुन्दर बिम्ब व भाव।

Krishna ने कहा…

बहुत भावपूर्ण मनमोहक ताँका...हार्दिक बधाई डॉ. शिवजी वास्तव जी।


शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय भीकम सिंह जी

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद कविता जी

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक आभार ।

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

सराहना एवं समीक्षा हेतु हार्दिक आभार सुशीला शील जी।

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद डॉ. सुरंगमा जी।

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

हार्दिक आभार कृष्णा जी।

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

वाह । भाई शिवजी श्रीवास्तव जी सुंदर ताँका की रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Jyotsana pradeep ने कहा…


आद.भाईसाहब शिवजी श्रीवास्तव जी,बहुत ख़ूबसूरत ताँका-सृजन के लिए हार्दिक बधाई आपको।