1-वरिन्दरजीत
सिंह बराड़ (बरनाला)
1.
दुःख हैं
ज़्यादा
लगते रास्ते बंद
मिले न सुख
खुद खुलेगी राह
लड़ दुःख के साथ ।
2 .
मालूम नहीं
कैसे जाऊँ मैं पार ?
मुश्किल रास्ते
हो हिम्मत का साथ
झुका दे कायनात ।
-0--
2-डॉ•ज्योत्स्ना शर्मा
1
रे मन तेरा
अद्भुत व्यवहार
दीप- नगरी
है जगर- मगर
हवा पहरेदार !
2
मोह ने बाँधा
बिछोह ने छुडाया
रिश्ते जंजीरे
मन ने पहचाना
अपना या पराया ।
3
बोझ न ढोना
क्या हीरे और मोती
संग न जाएँ
सुन्दर कर्म भले
औ’ मुस्कान सुहाए ।
4
बीज खुशी के
मैं बो आई थी कल
उग आएँगे
कुछ पौधे प्यारे- से
प्रेम- रस भीने -से ।
-0-