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मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

झुका दे कायनात


1-वरिन्दरजीत सिंह बराड़ (बरनाला) 
1.
दुःख हैं  ज़्यादा 
लगते रास्ते बंद 
मिले न सुख 
खुद खुलेगी राह 
लड़ दुःख के साथ ।
2 .
मालूम नहीं 
कैसे जाऊँ मैं पार ?
मुश्किल रास्ते 
हो हिम्मत का साथ 
झुका दे कायनात ।
-0--
2-डॉ•ज्योत्स्ना  शर्मा
1
रे मन तेरा
अद्भुत  व्यवहार
दीप- नगरी
है जगर- मगर
हवा पहरेदार !
 2
मोह ने बाँधा
बिछोह ने छुडाया
रिश्ते जंजीरे
मन ने पहचाना
अपना या पराया ।
 3
बोझ न ढोना
क्या हीरे और मोती
संग न जाएँ
सुन्दर कर्म भले
मुस्कान सुहाए ।
 4
बीज खुशी के
मैं बो आई थी कल
उग आएँगे
कुछ पौधे प्यारे- से
प्रेम- रस भीने -से ।
-0-

शनिवार, 3 नवंबर 2012

कारगिल (चोका)



करूँ सलाम 
जो शहीद हुए हैं 
कारगिल में 
थी हिम्मत की जीत 
दुश्मन पर 
था बैरी को भगाया 

दम दिखाया
 
रख जान हथेली 
लिए तिरंगा 
कोलोलिंग पहाड़ी 
जा फ़हराया 
जाम- ए-  शहादत 
पीते जवान 
वतन की खातिर 
चैन की नींद 
देशवासी हैं सोते 
सरहदों पे 
रक्षा वीर जवान 
जब तक करते !

वरिन्दरजीत सिंह बराड़