1-पुष्पा मेहरा
1
बूँद नहीं हूँ
मैं नाज़ुक ओस की,
गर्मी पा मिट
जाऊँ,
खिलती कली
ढिंढोरा पीट रही
सुगन्ध मैं फैलाऊँ ।
2
पतंगा नहीं
रोशनी की खातिर
जो मैं मिट ही जाऊँ,
किरण बनूँ
रंगींन धरा पर
बिछ,उजास
भरूँ ।
-0-
2-प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक’
1
शरद रात
आज पूनो का चाँद
प्रेम पीयूष
खूब बरसाएगा
लिए कोमल याद ।
2
रात पूनम
शरद की चाँदनी
धरा पे बिछी
आज पूनो का चाँद
प्रेम पीयूष
खूब बरसाएगा
लिए कोमल याद ।
2
रात पूनम
शरद की चाँदनी
धरा पे बिछी
स्नेह सिक्त गगन
आज चाँद मगन ।
3
कुनमुनाता
चल पड़ा अकेला
चाँद तनहा
झील की पगडण्डी
मुस्करा रही आज ।
4
आज चाँद मगन ।
3
कुनमुनाता
चल पड़ा अकेला
चाँद तनहा
झील की पगडण्डी
मुस्करा रही आज ।
4
नभ हैरान
चहुँ ओर बादल
घिरे हैं घने
पर दिखा नहीं क्यों
आज उसका चाँद ।
-0-
चहुँ ओर बादल
घिरे हैं घने
पर दिखा नहीं क्यों
आज उसका चाँद ।
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