गुरुवार, 17 नवंबर 2016

743



1-पुष्पा मेहरा

1

बूँद नहीं  हूँ

मैं नाज़ुक ओस की,

गर्मी पा मिट जाऊँ,

खिलती कली

ढिंढोरा पीट रही

सुगन्ध  मैं फैलाऊँ

2

पतंगा नहीं

रोशनी की खातिर

जो मैं मिट ही जाऊँ,

किरण बनूँ

रंगीं  धरा पर

बिछ,उजास भरूँ

-0-

2-प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक’

1

शरद रात
आज पूनो का चाँद
प्रेम पीयूष
खूब बरसाएगा
लिए कोमल याद ।
2
रात पूनम
शरद की चाँदनी
धरा पे बिछी

स्नेह सिक्त गगन
आज चाँद मगन ।
3
कुनमुनाता
चल पड़ा अकेला
चाँद तनहा
झील की पगडण्डी
मुस्करा रही आज ।
4

नभ हैरान
चहुँ ओर बादल
घिरे हैं घने
पर दिखा नहीं क्यों
आज उसका चाँद ।
-0-


मंगलवार, 15 नवंबर 2016

742



1-मंजूषा मन
1
टूटे सपने
सँभले न हमसे
रूठे अपने
मना -मना के हारे
टूटे मन के तारे।
2
कुछ नया- सा
रचना जो चाहें तो
साथ न मन,
रूठ जाए भावना
पूरी न हो कामना।
-0-
2-रेखा  रोहतगी
1
पगली, अलबेली है
कौन इसे बूझे
तकदीर पहेली  है ।
2
रब क्यों न कहूँ तुझको
 
तू ही सब करता
यश मिलता है मुझको ।
3    
क्यों मन है घबराता
साँझ ढले ही जब
तू लौट नहीं आता ।
4      
तू दिल में रहता है
आँखों से फिर भी
क्यों झरना बहता है ।
-0-

रविवार, 6 नवंबर 2016

741



1-रेखा रोहतगी
1
तू सच -सच बतलाना
उसमें क्या देखा
जो तुझको है जाना ।
-0-
rekhrohatgi@gmail.com
-0-
2-सुशील शर्मा
1
अनुभूतियाँ
प्रेम-संवेदनाएँ
मन का सुख
आंतरिक आनंद
प्रेम में ही विश्वास।
2
कड़वे बोल
दुःखद स्मृतियाँ
अप्रिय बातें
सजग हो दुखातीं
अंतस को सतातीं।
3
असफलता
अक्सर नापती है
हमारी छाती
दर्द की नींव पर
सफलता की
बाँग
4
तेरा निज़ाम
सना है सन्नाटे से
मरता सच
कराहता विश्वास
नहीं है कोई आस।
5
सच की मंडी
खूँटी पर लटका
बिकता सच
सच के मु
खौटों में
झूठ
- भरे चेहरे।
6
मुख़ौटा फेंक
असलियत दिखा
कुछ न छुपा
पीठ पर न मार
सीने पे कर वार।
-0-

मंगलवार, 1 नवंबर 2016

740



डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर
1
कृष्ण मुरारी
हरो तम जग का
ब्रज के जैसा
पूजन गोवर्धन
मंगल कामनाएँ!!
2
निहारे राह
पदचाप सुनते
तेरे आने की
हँगाई की मार
ओलावृष्टि की भाँति!!
3
मानव धर्म
सजी मानवीयता 
तुम्हारे संग
हृदय कपाट पे
निश्चल प्रेम कृष्णा!!
. -0-