रविवार, 22 नवंबर 2015

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1-मंजूषा मन
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आँखों भीतर
एक ही सपना था
वो भी न अपना था
टूटा पल में
उस सपने संग
जीना या मरना था .
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2-अनिता मंडा

सिन्दूर, बिंदी
चूड़ी और मेंहंदी,
लाल चुनरी
किये सब शृंगार
चौक सजाओ
मंगल गीत गाओ
वधू तुलसी
वर हैं शालिग्राम
ब्याह कराओ
देने शुभ आशीष
देव हैं उठे
वर-वधू अनूठे
लें फेरे सात
एकादशी पावन
लगे मनभावन।

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6 टिप्‍पणियां:

Pushpa mehra ने कहा…

sedoka aur tanka dono hi sunder hain, manjusha ji va anita ji badhai.


pushpa mehra

Dr.Bhawna ने कहा…

sundar rachnayen...hardik badhai...

अनिता मंडा ने कहा…

मञ्जूषा जी बहुत सुंदर सेदोका, बधाई।
पुष्पा जी , भावना जी आभारी हूँ आपकी आशीष मेरी रचना को मिली।

Jyotsana pradeep ने कहा…

manjusha ji va anita ji ... sedoka aur tanka dono hi sunder hain ..haardik badhai

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

बहुत सुन्दर रचनाएँ...आप दोनों को हार्दिक बधाई...|

ज्योति-कलश ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ....हार्दिक बधाई !