मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018

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मंजूषा मन

1
जीना मजबूरी है
खुशियों से अपनी
सदियों की दूरी है।
2
उस ओर सवेरे हैं
बातें झूठी सब
हर ओर अँधेरे हैं।
3

कैसे ताने बाने
जीवन चादर में
धागे खुद को ताने।


20 टिप्‍पणियां:

अनिता मंडा ने कहा…

सुंदर लयबद्ध महिये मंजूषा जी के।

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बहुत बढिया माहिया।

Dr.Bhawna ने कहा…

उस ओर सवेरे हैं
बातें झूठी सब
हर ओर अँधेरे हैं।
Bahut sahi kaha sachchai ko batan bahut bakhubi se kiya mahiya ke liye aapko badhai

dr.surangma yadav ने कहा…

मंजूषा जी मनमोहक माहिया।बहुत बहुत बधाई।

Rohitas ghorela ने कहा…

उम्दा माहिया.

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

बेहतरीन माहिया...बहुत बधाई...|

Satya sharma ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन माहिया
हार्दिक बधाई मंजूषा जी

ज्योति-कलश ने कहा…

सुन्दर , सरस , बधाई !

मंजूषा मन ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद अनीता जी

मंजूषा मन ने कहा…

सादर आभार आपका सुदर्शन दीदी

मंजूषा मन ने कहा…

हार्दिक आभार आपका भावना जी

मंजूषा मन ने कहा…

हार्दिक आभार सुरंगमा जी

मंजूषा मन ने कहा…

हार्दिक आभार रोहिताश जी

मंजूषा मन ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद प्रियंका जी

मंजूषा मन ने कहा…

हार्दिक आभार सत्या जी

मंजूषा मन ने कहा…

हार्दिक आभार आपका

Vibha Rashmi ने कहा…

वाह ! सुन्दर

मंजूषा मन ने कहा…

हार्दिक आभार आपका

मंजूषा मन ने कहा…

बहुत बहुत आभार आपका विभा जी

Krishna ने कहा…

बहुत बढ़िया माहिया...मंजूषा जी बहुत बधाई।