मंगलवार, 17 सितंबर 2019

885-अधर-हस्ताक्षर


डॉ.पूर्वा शर्मा
 1.     
रिश्ता निराला
शरारतों में डूबा
बचपन हमारा,
कुछ टॉफियाँ
राखी के बदले में
अब नहीं मिलतीं
2.     
ज़िंदगी चखे
चाशनी से टुकड़े
प्रत्येक मोड़ पर,
मन ना भरे
मनभावन यादें
करती रही बातें
3.     
खाली है झोली
देखे खड़ा बेबस 
फ़कीर-सा शिशिर,
पिटारा भर
पुष्प-पल्लव लाया
ये वसंत खजांची।
4.     
अडिग रही
हरेक मौसम में
साहिल-सी ज़िन्दगी,
हिलोरे खाती
ऊँची, तो कभी नीची
लहरें सुख-दुःख।
5.     
वर्षों पहले
भाल पर थे सजे
अधर हस्ताक्षर,
भीनी ताज़गी
अब तक अंकित
मन भी पुलकित।
-0-

9 टिप्‍पणियां:

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

मीठी यादें लिए बेहतरीन सेदोका, मज़ा आ गया पूर्वा जी!भाल पर थे सजे अधर हस्ताक्षर/ज़िन्दगी चखे चाशनी से टुकड़े.... बहुत बढ़िया।

Ravi Sharma ने कहा…

वाह पूर्वा शानदार । दिन ब दिन तुम्हारी लेखनी की धार और तेज़ तथा मजबूत होती जा रही है । बधाई ।

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

बहुत बढ़िया सेदोका रचे हैं पूर्वा जी हार्दिक बधाई |

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बेहतरीन सेदोका। कुछ टॉफियाँ / राखी के बदले में/अब नहीं मिलतीं। वर्षों पहले/ भाल पर थे सजे /अधर हस्ताक्षर।बचपन की कितनी सुंदर स्मृतियाँ। हार्दिक बधाई पूर्वा जी

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बेहतरीन सेदोका। कुछ टॉफियाँ / राखी के बदले में/अब नहीं मिलतीं। वर्षों पहले/ भाल पर थे सजे /अधर हस्ताक्षर।बचपन की कितनी सुंदर स्मृतियाँ। हार्दिक बधाई पूर्वा जी

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत सुन्दर सेदोका, बचपन की स्मृतियाँ सजीव हो उठीं ।बधाई आपको ।

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

मीठी मनमोहक यादें! बहुत सुंदर!
हार्दिक बधाई पूर्वा जी!

~सादर
अनिता ललित

Jyotsana pradeep ने कहा…

बहुत ही सरस और मनभावन सेदोका लिखे हैं पूर्वा जी आपने ,हार्दिक बधाई आपको !!

Krishna ने कहा…

मृदु स्मृतियाँ लिए बहुत सुंदर सेदोका...हार्दिक बधाई पूर्वा जी।