शनिवार, 27 जून 2020

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ज्योत्स्ना प्रदीप  
1
ये  प्रीत निराली है 
पग  पायल  बाँधी 
कितनी मतवाली है ।
2
जब मोहन मीत बना 
पायल की छम- छम 
बिरहा का गीत बना ।
3
माना  मैं ना  मीरा  
तेरा  नाम    लिए 
मन को  मैंने चीरा ।
4
राधा -सा  भाग  नहीं 
तुझसे   मिलने  की 
क्या मुझमें आग नहीं
5
अब श्याम  सहारा दो 
 तुम बिन  नाच रही 
 सुर  की नव - धारा दो ।
6
मीरा ना  राधा  हूँ 
तेरा   नाम  लिया 
बोलो क्या बाधा हूँ
7
मन में तुम आते हो  
मन - केकी  नाचे 
जब सुर बरसाते हो 

8
मोहन  वो  लूट गया   
पायल  का  मोती 
उसके  दर  छूट गया !
9
पीड़ा अब अठखेली 
मेरी पीर सभी
खुद मोहन ने  ले लीं 
-0-

11 टिप्‍पणियां:

umesh mahadoshi ने कहा…

bahut sundar!

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

प्रेम और विरह के सुंदर माहिया।ज्योत्स्ना प्रदीप जी को बधाई।

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बहुत सुंदर भावपूर्ण माहिया।बधाई ज्योत्सना

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत सुन्दर माहिया।बधाई ज्योत्सना जी ।

Dr. Purva Sharma ने कहा…

वाह! सुंदर माहिया ज्योत्स्ना जी
हार्दिक बधाइयाँ

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

सभी माहिया खूबसूरत हैं प्रभु प्रेम में मग्न मीरा से प्रभावित और विरह पीड़ा में सने माहिया हैं हार्दिक बधाई |

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

वाह! ज्योत्स्ना जी एक से बढ़कर एक माहिया, बड़ा आनन्द आया, आपको ढेर सारी शुभकामनाएँ!!

सदा ने कहा…

वाह बहुत ही शानदार सृजन ....बधाई सहित शुभकामनाएं

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

राधा , कृष्ण ,मीरा पर केंद्रित सुंदर अभिव्यक्ति , बधाई ।

Krishna ने कहा…

भावपूर्ण सृजन बधाई आपको।

Jyotsana pradeep ने कहा…

आद.भैया जी एवँ बहन हरदीप जी का हृदय से आभार मेरे माहिया को यहाँ स्थान देने के लिए ! आप सभी साथियों का भी दिल से शुक्रिया !