बुधवार, 7 अक्तूबर 2020

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ज्योत्स्ना प्रदीप 

1

मन- वीणा  बजनी है 

तुमसे मिलने की 

पहली ये  रजनी है ।

2

मधुमाधव मन  आया 

मलय समीर हँसा 

मौसम ये मुसकाया ।

3

नैना जलजात बनें 

पीर- भँवर बंदी 

देखो उस रात बनें !

4

जीवन अब  तेरा है 

प्राची नाच उठी 

दिल में न अँधेरा है ।

5

नव प्रेम कहानी है 

तेरे संग पिया 

इक सदी बितानी है ।

6

तू कैसा रे  प्रियतम 

भूला प्रेम  घना 

मुनि बेटी- सा ये  मन !

7

तन -मन का वो बंधन 

 पल  में बिसराया

अब शेष बचा  क्रंदन ।

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23 टिप्‍पणियां:

नंदा पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही बढ़िया 👌

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत सुन्दर!मन वीणा .....।

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बहुत सुंदर मनभावन माहिया

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

अच्छे माहिया लेखन की बधाई ।

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

वाह, मनभावन माहिया।बधाई ज्योत्स्ना जी

Rashmi Vibha Tripathi ने कहा…

बहुत सुन्दर माहिया!
हार्दिक बधाई आदरणीया!
सादर!

Krishna ने कहा…

बहुत सुंदर माहिया...ज्योत्स्ना प्रदीप जी हार्दिक बधाई।

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

एक से बढ़कर एक मनभावन माहिया!आपको ढेरों शुभकामनाएँ ज्योत्स्ना जी!

bhawna ने कहा…

बेहतरीन माहिया ज्योत्सना जी। बधाई।

Vibha Rashmi ने कहा…

मन को छूते प्यारे माहिया । बधाई ज्योत्स्ना जी ।

Jyotsana pradeep ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Jyotsana pradeep ने कहा…

बहुत आभार जी !

Jyotsana pradeep ने कहा…

दिल से शुक्रिया जी !

Jyotsana pradeep ने कहा…

हार्दिक आभार आदरणीया !

Jyotsana pradeep ने कहा…

हृदय-तल से धन्यवाद आपका !

Jyotsana pradeep ने कहा…

आदरणीय शिवजी श्रीवास्तव जी, दिल से आभार आपका !

Jyotsana pradeep ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद जी !

Jyotsana pradeep ने कहा…

दिल से शुक्रिया आद.दी !

Jyotsana pradeep ने कहा…

हृदय से धन्यवाद प्रीति जी !

Jyotsana pradeep ने कहा…

हार्दिक आभार भावना जी !

Jyotsana pradeep ने कहा…

बहुत-बहुत धन्यवाद आद.दी !

Jyotsana pradeep ने कहा…

बहुत-बहुत धन्यवाद आद.दी!

Jyotsana pradeep ने कहा…


मेरे माहिया को यहाँ स्थान देने के लिए आदरणीय भैया जी और प्यारी बहन हरदीप जी का हृदय तल से आभार करती हूँ!