बुधवार, 18 अगस्त 2021

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 पूनम  सैनी








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सेदोका-मीरा गोयल

1

लग जा गले

आडम्बर न कर

मेजबान होने का,

न मेहमान।

समय नहीं बचा

पानी-सा बह चला।

2

अधीर हिय

विरोधी आकांक्षाएँ

पराजय निश्चित

एक म्यान में

चाहो दो तलवार

असंभव चयन।

3

महत्त्वाकांक्षा

निश्चयात्मक पग

लक्ष्य सिद्धि संभव

माया न क्षोभ

लक्ष्य बने सर्वस्व

धर्म कर्म नियम।

4

हठी  है हं!

दुःख सहना, देना

है, उसका व्यसन

जीतने न दो

तोड़ो ये सिलसिला

आत्मा को मत रुला।

5

त्रिगुणात्मक

नियम प्रकृति का

है सत, रज, तम

लो पहचान।

सहर्ष अपनाओ

संघर्ष बिसराओ।

6

मोह व्यर्थ है

चिन्ता है निरर्थक

कर्म बने प्रधान

शुद्ध हृदय

सरल अभिव्यक्ति

सार्थक हो जीवन।

7

नहीं विजय

प्रकृति से उलझे

अखण्डित नियम

अपक्षपाती

भोगना है सब को

आज नहीं तो कल।

8

मानव मन

शंकित पीड़ित क्यों

न छोड़ सके माया

न त्यागे धर्म

साँप छछून्दर-सा

उगले न निगले।

9

मानव मन

अनबूझ पहेली

खुद नहीं जानता

चाहता है क्या

पूरब औ पच्छिम

चाहता साथ साथ।

10

मिलोगे तुम

प्रफुल्लित हुई मैं

तुम्हारी इच्छा पूर्ति

संतोष मुझे

सफलित कमाना

सुखी अन्तरात्मा।

-0- madeera.goyal@gmail.com

8 टिप्‍पणियां:

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18-08-2021को चर्चा – 4,161 में दिया गया है।
आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
धन्यवाद सहित
दिलबागसिंह विर्क

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर

Amrita Tanmay ने कहा…

सहज अभिव्यक्ति । अति सुन्दर ।

मन की वीणा ने कहा…

सुंदर सार्थक सेदोका।

Rashmi Vibha Tripathi ने कहा…

बहुत ही सुन्दर ताँका व सेदोका।
हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ आप दोनों को।

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत ही सुंदर।
सादर

शैलपुत्री ने कहा…

बहुत सुन्दर रचनाकार द्वय को हार्दिक बधाई

Dr. Shailesh Veer ने कहा…

हार्दिक बधाई