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रविवार, 16 अप्रैल 2023

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 अंजु दुआ जैमिनी

1

कलम जगी

सैर पर निकली

भाव समेटे

कागज़ को चूमती

कविता उग आई।


2

नाचती नदी

झूमते पेड़- पौधे

गाता सागर

आदमी आ धमका

जेबों में भर गया।

3

बीमारी घेरे

अपने भी पराए

स्याह सवेरे

सेहत की दौलत

बचाकर रखना।

4

बेटियाँ आईं

माँ की सालगिरह

ममता भीगी

बचपन की बातें

कोने- कोने से झाँकें।

5

बादल- बाहें

बारिश जो फिसली

मोर मुस्काया

सूरज धुंधलाया

खेत खिलखिलाया।

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