अंजु दुआ जैमिनी
1
कलम जगी
सैर पर निकली
भाव समेटे
कागज़ को चूमती
कविता उग आई।
2
नाचती नदी
झूमते पेड़- पौधे
गाता सागर
आदमी आ धमका
जेबों में भर गया।
3
बीमारी घेरे
अपने भी पराए
स्याह सवेरे
सेहत की दौलत
बचाकर रखना।
4
बेटियाँ आईं
माँ की सालगिरह
ममता भीगी
बचपन की बातें
कोने- कोने से झाँकें।
5
बादल- बाहें
बारिश जो फिसली
मोर मुस्काया
सूरज धुंधलाया
खेत खिलखिलाया।
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