1-शशि पाधा
1
कुछ भूला- भटका सा
इत-उत फिरता मन
अम्बर से लटका -सा ।
2
क्यों माया जाल बुना
बंद पिटारी से
क्यों जी जंजाल चुना ।
3
दो दिन का डेरा है
नगरी अनजानी
बस रैन बसेरा है।
4
दुख कितना भोग लिया
जब से लगन लगी
सुख से संयोग किया।
5
दोराहे आन खड़े
रसता सूझे ना
शंका में पाँव जड़े ।
6
सब कुछ जब अर्पण हो
धुँधला मिट जाए
मन निर्मल दर्पण हो ।
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2-मंजु गुप्ता
1
बनके उपकार
नदी
है माँ की महिमा
गाती हर एक सदी .
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है माँ की महिमा
गाती हर एक सदी .
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