गुरुवार, 8 जून 2017

767

1-कमला  निखुर्पा
1
थी मैं अभिधा 
गिनाए जो तुमने
लक्षण मेरे 
बन गई व्यंजना 
खुद को पहचाना ।
-0- 
2-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
1
मैं निरुत्तर
तेरा नेह-विस्तार
धरा से नभ
नहीं पा सका पार
भिगो रही बौछार ।
-0-
रमेश कुमार सोनी  
1
नदी अकेली
प्यास बुझाने दौड़ी
बस्ती बसाती
प्रदूषित हो जाती
बचाओ नहीं बोली।
2
धूप की कूची
भित्ति चित्र पेड़ों के
रोज बनाती
सदा से ही अधूरी
छोटी –बड़ी हो जाती।

-0-

गुरुवार, 1 जून 2017

766

रेखा रोहतगी
1
जो उनसे अनबन  है
रूठूँ  या मानूँ

दिल में ये उलझन है
 2
 
तुमने मारा ताना
 
तीर धँसा दिल में
 
तुमने ये कब जाना।
 3
 
जो बात नहीं जँचती
 
लाख जतन कर लूँ
 
वो बात नहीं  पचती
4
 
मैं गुस्से में ऐंठी
जाते देख उसे
सब मान भुला बैठी

सोमवार, 29 मई 2017

765

माहिया : डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 
1
आँखों बरसात हुई
वीर शहीदों से
सपने में बात हुई । 
2
बोला इक मत रोना 
दिल के दाग़ सभी 
आँसू से मत धोना ।
3
थोड़ा समझा देना 
संदेशा मेरा 
घर तक पहुँचा देना । 
4
माँ ! सुत था अलबेला
वैरी की गोली
छाती पर हँस झेला । 
5
बाबा कब हारे हैं 
ये मेरे साथी 
सब पुत्र तुम्हारे हैं । 
6
उस गुड़िया से कहना 
तू मजबूर नहीं 
बन योद्धा की बहना । 
7
कहना ना हरजाई
लिपट तिरंगे में 
जब घर लौटे भाई ।
8
हाँ फ़र्ज़ निभाया है 
माटी का हमने 
बस क़र्ज़ चुकाया है ।
9
कह देना प्यारी से 
राह तके मेरी 
इकटक सुकुमारी से ।
10
क्या पूछो कैसी है 
वो मेरी चाहत 
फूलों के जैसी है ।
11
हाथों भर हो चूड़ा 
सिन्दूरी बिंदी 
महके गजरा जूड़ा । 
12
वादा  ना निभ पाया 
कहकर भी मिलने 
मैं लौट नहीं आया । 
13
थोड़ी मजबूरी थी 
सीमा की रक्षा 
भी बहुत ज़रूरी थी । 
14
विनती है ,सुन लेना 
साँसों की डोरी 
ख़ुशियों को चुन लेना । 
15
है उम्र अभी छोटी 
मुश्किल है सहना 
जग की नज़रें खोटी । 
16
काँटो पर मत चलना 
जीवन की भट्टी 
यूँ ठीक नहीं जलना । 
17
होनी से खुद लड़कर
चुन लेना साथी 
कोई आगे बढ़कर । 
18
तड़पी ,फिर बोल गई 
मन की सब पीड़ा 
रो-रो कर खोल गई ।
19
कैसे कायर माना
क्यों ,मनमीत कहो
मुझको ना पहचाना । 
20
पूरी तैयारी है 
तेरा क़र्ज़ चुका 
अब मेरी बारी है ।
21
पीछे तो आना था 
नन्हे को लेकिन 
फ़ौलाद बनाना था । 
22
मैं वचन निभाऊँगी 
माँ-बाबा मेरे 
हर सुख पहुँचाऊँगी ।
23
बहना का ज़िक्र करो 
ख़ूब सजे डोली 
उसकी मत फ़िक्र करो । 
24
पक्की है नींव बड़ी
सुन लेना ,प्यारी
सरहद पर आन लड़ी । 
25
जब लाल बड़ा होगा 
बन दीवार अटल 
सरहद पे खड़ा होगा । 
26
वो पल भी आएँगे
नभ के तारों में 
हम संग मुस्काएँगे । 
27
सुनकर मन डोल गया 
जय उन वीरों की
सारा जग बोल गया । 
-0-