गुरुवार, 14 अगस्त 2014

बीती काली रातें ।



माहिया
1-शशि पुरवार
1
आजादी की बातें
दिल में जोश भरे
बीती काली रातें ।
2
भाई पर वार करे
घर का  ही भेदी
छलिया संहार करे ।
3
है अलग -अलग  भाषा
मान तिरंगे का
जन- जन की अभिलाषा ।
4
पीर हुई गहरी -सी
सैनिक घायल है
फिर सरहद ठहरी सी ।
5
क्या नेता है जाने
सरहद की पीड़ा
सैनिक ही पहचाने ।
6
वैरी की सौगातें
आँखों  में कटती  
हर सैनिक की रातें ।
7
साँचे ही करम करो
देश हमारा है
उजियारे रंग भरो।
8
चैन अमन से खेले
बागों की कलियाँ
खुशियों के हों मेले ।
-0-
2-कृष्णा वर्मा
1
नभ में जब मेघ घिरें
मन के सागर में
यादों के हंस तिरें।
2
छ्म-छ्म पानी बरसा
धरती चहक उठी
उसका तन-मन हर्षा।
3
बादल है आवारा
इत-उत यूँ भटकें
ज्यों फिरता बंजारा।
4
मेघा घट भरते हैं
मटकी दरके तो
फिर आँसू झरते हैं।
5
बूँदें जब आती हैं
नदिया नागिन -सी
लहरा बल खाती है।
6
मेघा जब हों काले
छिटकाते बूँदें
मन होते मतवाले ।
7
जलधर घुमड़े काले
प्यासे कूप भरें
हों तृप्त नदी नाले!
-0-
ताँका
डॉ सरस्वती माथुर
1
पुष्प चढ़ाऊँ
आजादी पर्व पर
एकता पिरो
गूँथ मोती की माला
मेरा देश निराला ।
2
कोशिश करें
प्यार की सुगंध से
मिलजुलके
देश को महकाएँ
सद्भाव ही सिखाएँ ।
-0-

‘किलकारी’ में हाइकु–ताँका कार्यशाला



किलकारी में हाइकुताँका कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न
- डॉoसतीशराज पुष्करणा
पटनाकिलकारी बिहार बाल भवन के तत्वावधान में 29 जून को हाइकुताँका पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ कार्यशाला की संयोजक श्रीमती मधुरिमा के स्वागतभाषण से हुआ। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि आज के इस आपाधापी युग में आदमी कम समय में अधिक से अधिक कार्य करना चाहता है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से लघुआकारीय विधाओं का महत्त्व बढ़ जाता है। गद्य में जहाँ आज के समय में लघुकथा पाठकों का स्नेह अर्जित कर रही है, वहीं पद्य में जापान से आई विधाओं में हाइकु और ताँका पाठकों का  ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।इसलिए किलकारी अपने बच्चों को इन विधाओं की जानकारी देने हेतु इनके सृजन का प्रशिक्षण देने हेतु, ख्यातिलब्ध हाइकुताँकाकार डॉ सतीशराज पुष्करणा को आमंत्रित किया है। इन्होंने लघुकथा के अतिरिक्त इन विधाओं में भी पर्याप्त कार्य किया है।
डॉ पुष्करणा ने इन विधाओं की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए इनकी अन्तर्वस्तु तथा शिल्प पर विस्तार चर्चा करते हुए बताया कि हाइकु 5, 7, 5 वर्णों की त्रिपदीय ऐसी कविता है जिसमें किसी एक भाव अथवा चित्र को सहजता से प्रस्तुत किया जाता है। किन्तु 5, 7, 5 में लिखी कोई भी त्रिपदीय रचना हाइकु नहीं होती। इसमें कवित्व का होना अनिवार्य है। इसी प्रकार ताँका 5, 7, 5, 7, 7 यानी इकतीस वर्णों की पंचपदीय कविता है। इसमें कवित्व की अनिवार्यता है।
इन्हें कैसे लिखा जाए प्रशिक्षण में यह बताने के साथसाथ सभी बच्चों से दसदस हाइकु एवं दसदस ताँकाओं को वहीं कार्यशाला में लिखवाया गया तथा तत्पश्चात् उन सभी हाइकु एवं ताँकाओं पर खुली चर्चा की गई। फिर डॉ पुष्करणा द्वारा समुचित संशोधन एवं परिमार्जन के पश्चात् बच्चों को इसकी बारीकियों से भी अवगत कराया। इस कार्यशाला में लगभग बीसपच्चीस बच्चों ने भाग लिया। सभी ने अपने पाँचपाँच ताँका एवं पाँचपाँच हाइकु लिखकर कार्यशाला की संयोजक श्रीमती मधुरिमा को सौंप दिये।
श्रीमती मधुरिमा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह कार्यशाला अपनी पूर्णता को प्राप्त हुई।
( अभिनव प्रत्यक्ष जुलाई -2014 से साभार)

रविवार, 10 अगस्त 2014

यह धागा पावन है



शशि पाधा
1
यह धागा पावन है
उत्सव राखी का
सब का मनभावन है ।
2
कुल रीत निभाई है
कितने चाव लिये
बहिना घर आई है ।
3
बहिना तो गुड़िया -सी
अब भी यह लगती
खुशियों की पुड़िया- सी ।
4
रोली औ चन्दन है
पूजन थाली में
मंगल अभिनन्दन है ।
5
मन में झंकार  बजे
भैया के माथे
यह टीका खूब सजे ।
6
कैसी मजबूरी है
माँ के अगना से
मीलों की दूरी है ।
7
अब के जो आना तू
वादा कर बहिना
जल्दी ना जाना तू ।
8
नैहर की गलियाँ हैं
कैसे छोडूँगी
केसर की कलियाँ हैं ।
-0-
2- डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
1
ये राखी के धागे
सुख की किरण बनें
फिर दुख का तम भागे
2
दमके नैहर मेरा
खूब सजे भाभी
शृंगार अमर तेरा
3
राखी पे बलिहारी
फूलों- से महके
भैया की फुलवारी
-0-
3-सुदर्शन रत्नाकर
1
ये प्यार अनोखा है
राखी- सा पावन
बन्धन  ना देखा है !
2
ये प्यार –भरे रिश्ते
टूहीं पाएँ
मुश्किल से हैं  मिलते ।