माहिया
1-शशि पुरवार
1
आजादी की बातें
दिल में जोश भरे
बीती काली रातें ।
2
भाई पर वार करे
घर का ही भेदी
छलिया संहार करे ।
3
है अलग -अलग भाषा
मान तिरंगे का
जन- जन की अभिलाषा ।
4
पीर हुई गहरी -सी
सैनिक घायल है
फिर सरहद ठहरी सी ।
5
क्या नेता है जाने
सरहद की पीड़ा
सैनिक ही पहचाने ।
6
वैरी की सौगातें
आँखों में कटती
हर सैनिक की रातें ।
7
साँचे ही करम करो
देश हमारा है
उजियारे रंग भरो।
8
चैन अमन से खेले
बागों की कलियाँ
खुशियों के हों मेले ।
-0-
2-कृष्णा वर्मा
1
नभ में जब मेघ घिरें
मन के सागर में
यादों के हंस तिरें।
2
छ्म-छ्म पानी बरसा
धरती चहक उठी
उसका तन-मन हर्षा।
3
बादल है आवारा
इत-उत यूँ भटकें
ज्यों फिरता बंजारा।
4
मेघा घट भरते हैं
मटकी दरके तो
फिर आँसू झरते हैं।
5
बूँदें जब आती हैं
नदिया नागिन -सी
लहरा बल खाती है।
6
मेघा जब हों काले
छिटकाते बूँदें
मन होते मतवाले ।
7
जलधर घुमड़े काले
प्यासे कूप भरें
हों तृप्त नदी नाले!
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ताँका
डॉ सरस्वती माथुर
1
पुष्प चढ़ाऊँ
आजादी पर्व पर
एकता पिरो
गूँथ मोती की माला
मेरा देश निराला ।
2
कोशिश करें
प्यार की सुगंध से
मिलजुलके
देश को महकाएँ
सद्भाव ही सिखाएँ ।
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