1-सुदर्शन
रत्नाकर
1
कैसी लाचारी है
शक्ति कहाती है
फिर भी बेचारी है ।
2
सबके दुख सहती है
आँसू पीकर भी
उफ़ तक ना कहती है ।
3
भँवरे मँडराते हैं
साथी छोड़ गए
वे लौट न पाते हैं ।
-0-
2-कृष्णा वर्मा
1
रुत फूलों की आई
तितली नाच रही
भौरे सब सौदाई।
2
रंगों की फुलवारी
धरती पर काढ़ी
किसने ये फुलकारी ।
3
नैनों से नैन मिलें
अधरों की बगिया
मुस्काने आन खिलें।
4
लतिकाएँ फूल रहीं
तरु की बाँह धरे
मस्ती से झूल रहीं।
5
शाखाएँ हुलसाईं
विहग झुलाने की
मतवाली रुत आई।
6
भँवरे जब-जब डोलें
सकुचाएँ कलियाँ
घूँघट पट ना खोलें।
-0-
