गुरुवार, 12 मई 2016

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1-सुदर्शन रत्नाकर
1
बिन मौसम सावन है
रिश्ता तेरा-मेरा
पूजा-सा पावन है  ।
2
बिन सावन घन बरसे
पुत्र विदे गया
माँ की आँखें तरसें  ।
3
मेघा ना बरसे हैं
सूख गई धरती
बिन पानी तरसे है ।
4
कुहू-कुहू वो बोले
चुपके से आकर
कानों में रस घोले ।
5
चाँदी-सी रातें हैं
आ मिल बैठ करें
दिल में जो बातें हैं।
-0-
5+7+7+5+7+7

कमला निखुर्पा
1
झरे फुहार
झमक झमा झम
सिहर उठी धरा ।
बिहँसे मेघ 
धूसरित वसन
दमक लहराया ।
2
नभ- मंडप
थिरकती चपला
बज उठे नगाड़े ।
मेघ साजिंदे
बूँदों की थाप संग
झूम के तरु गाएँ

-0-
5+7+7+5+7+7

2-कमला निखुर्पा
1
झरे फुहार
झमक झमा झम
सिहर उठी धरा ।
बिहँसे मेघ 
धूसरित वसन
दमक लहराया ।
2
नभ- मंडप
थिरकती चपला
बज उठे नगाड़े ।
मेघ साजिंदे
बूँदों की थाप संग
झूम के तरु गाएँ
-0-

2-कृष्णा वर्मा      
1
ढले जो दिन
दबे पाँव उतरे
साँवरी साँ
सलेटी यादों की
खोलती गाँठ
आ लिपटें मन से
बरखा में ज्यों
बिजली गगन से
मन के घन
यादें घनघनाएँ
पिघले पीड़ा
अखियाँ बरसाएँ
ज्यों-ज्यों शाम
ओढ़ती जाए रात
स्मृति- बौछार
प्रखर होती जाए
साँझ निगोड़ी
काहे करे हैरान
सुलगा जाए
फिर बुझी राख में
क्यों यादों वाली आँच।
2
छाने लगे जो
मन-आकाश पर
भावों के मेघ
झरने लगती हैं
चिंतन- बूँदें
जोतने लगती है
कलम नोक
कोरे काग़ज़ी खेत
अँकुरा जाते
संवेदना के बीज
उग आती हैं
शब्दों की फुलवारी
महक उठें
गीत ग़ज़ल छंद
मौलिक अनुबन्ध
3
साँझ के गाल
लगा जो रंग लाल
सूर्य –अश्वों की
हुई मध्यम चाल
उतरा रवि
सिंधु  करने स्नान
मौन हो धूप
रोए है ज़ार-ज़ार
बालू में खिंडी
जो रंगों की डलिया
बंसी में फूँके
सुर कोई छलिया
खड़ा सुदूर
चन्द्रमा मुस्कुराए
रात के पल्लू
तारे टिमटिमाए
रात उचक
देखे भीगे नज़ारे
लहरों की पीठ पे
झूलें सितारे
आ बैठा चाँद
बरगद की डाल
हौले-हौले से
उतरी जो चाँदनी
जागा ख़ुमार
रात की रानी जगी
महका प्यार
जुन्हाई में नहाई
सगरी कायनात।

-0-

15 टिप्‍पणियां:

Kamlanikhurpa@gmail.com ने कहा…

मौलिक अनुबंध मन को छू गया कृष्णाजी .. बधाई स्वीकारे ..

Kamlanikhurpa@gmail.com ने कहा…

सुन्दर माहिया ... रत्नाकरजी ... गुनगुनाने को जी करता है .. सुन्दर सृजन के लिए बधाई / शुभकामनाएं

Manju Gupta ने कहा…

सभी एक से बढाकर एक रचनाएं .
रत्नाकर जी कृष्णा जी बधाई

ज्योति-कलश ने कहा…

Pooja se pavan bahut sundar saras mahiya ..bahut badhaaii Didi !

Varsha ka sangeet bahut Madhur ! Haardik badhaaii Kamla ji !

Sabhi mohak Lekin sagari kaayanaat behad khoobasoorat ..bahut badhaaii Didi !

Krishna ने कहा…

बहुत खूबसूरत माहिया रत्नाकर जी... बहुत बधाई!

Jyotsana pradeep ने कहा…

बिन मौसम सावन है
रिश्ता तेरा-मेरा
पूजा-सा पावन है ।
सुन्दर माहिया ... रत्नाकरजी शुभकामनाएं!!!

Jyotsana pradeep ने कहा…

krishna ji ,kamla ji bahut sundar rachnaayen hain bahut -bahut badhaaii !

Sudershan Ratnakar ने कहा…

कमलाजी सुंदर सेदोका। बधाई

Sudershan Ratnakar ने कहा…

कृष्णाजी मनमोहक चोका। बधाई

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

रत्नाकर जी के माहिया और कृष्णा जी के चोका के सुन्दर सृजन पर हार्दिक बधाई |

Pushpa mehra ने कहा…

सुंदर माहिया और चोका हेतु सुदर्शन जी व कृष्णा बधाई |

पुष्पा मेहरा

Dr.Bhawna ने कहा…

charon tarf bahar aayi hui hai is post men to rachnakron ko meri hardik badhai sundar lekhn ke liye..

Sudarshan ने कहा…

आज अचानक खजाना हाथ लग गया।मन भाव विभोर हो गया ।छोटी -छोटी पंक्तियाँ -गगागर मे सागर,रत्नाकरोजी हार्दिक अभिनंदन ।

Sudarshan ने कहा…

आज अचानक खजाना हाथ लग गया।मन भाव विभोर हो गया ।छोटी -छोटी पंक्तियाँ -गगागर मे सागर,रत्नाकरोजी हार्दिक अभिनंदन ।

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

मनभावन रचनाएँ पढ़ के बेहद अच्छा लगा...| आप सभी को बहुत बधाई...|