गुरुवार, 5 सितंबर 2019

883--अमूल्य भेंट


[बहन कमला निखुर्पा द्वारा भेजी अतुल्य एवं अमूल्य भेंट सबको समर्पित। इन उद्गारों के लिए मैं चिर ॠणी रहूँगा। -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]

(शिक्षक दिवस पर मेरे सृजन गुरु मेरे हिमांशु भैया को समर्पित ये चोका )
कमला निखुर्पा ( प्राचार्या केन्द्रीय विद्यालय , पिथौरागढ़-उत्तराखण्ड)


हाथों में थमा
सृजन की लेखनी
नेह सियाही 
भर यूँ छिटकाई
उठी लहर 
भीगा-भीगा अंतर
तिरते शब्द
उड़े क्षितिज तक 
मिलन हुआ
धरा से गगन का
रच ली मैंने
फिर नई कविता
निकल पड़ी
अनजानी राह पे
मिलते रहे
पथ में  साथी -संगी
कोई हठीली
अलबेली सहेली
हवा वासंती 
बदरी सावन की
प्प से गिरे
सिहरा के डराए
भिगो के माने
रिमझिम की झड़ी 
राह में मिली 
नटकेली कोयल 
छिप के छेड़े
कूक हूक जगाए
बागों में मिली
तितली महारानी
फूलों का हार
पाकर इतराई 
गुंजार करे 
भाट भँवर -टोली
सृजन राह
अनुपम पहेली
 नई -सी भोर
 निशा नई नवेली 
नवल रवि
चंद्रिका-सी सहेली।
मुड़के देखूँ
चित्र;प्रीति अग्रवाल
दूर क्षितिज पार 
तुम्हें ही पाऊँ
गहन गुरु -वाणी
थामे कलम
नेह भर सियाही
बूँदे छिटकी
सुधियों की सरिता 
उमगी बह आई।
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14 टिप्‍पणियां:

अनिता मंडा ने कहा…

वाह, बहुत ही सुंदर भावनाओं का शब्दांकन, आप दोनों तक मेरा प्रणाम पहुंचे। इतने सुंदर साथ के लिए बारम्बार आभार। आपके प्रेरणा शब्द सृजन के लिए प्रेरक प्रकाश पुंज हैं।

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा है। भावनाओं को पिरो कर रख दिया। आप दोनों को मेरा प्रणाम

पूनम सैनी ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना है मैम।

पूनम सैनी ने कहा…

जो प्यार और सीख हमे गुरु जी से मिली है उसे शब्दों में पिरोना संभव ही नहीं है। जिन शब्दों को काव्य में पिरोने का ज्ञान ही गुरु जी ने दिया है उन्हें उन्हीं शब्दों में बांधना बहुत मुश्किल है। बहुत बहुत आभार गुरु जी इस स्नेह और शिक्षा के लिए।🙏

Jyotsana pradeep ने कहा…


नेह भर सियाही
बूँदे छिटकी
सुधियों की सरिता
उमगी बह आई
बहुत सुन्दर...सच में एक अमूल्य भेंट !!

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

वाह,कमला बहिन ने आपके लिये श्रध्दा भाव से जिन उद्गारों को व्यक्त किया है,वे हृदय की अतल गहराइयों से निःसृत हैं।आपने अनेक लोगों को लिखने की कला सिखलाई, लेखन की ओर प्रवृत्त किया,निःसन्देह आप एक श्रेष्ठ गुरु हैं ,उन्होंने सच ही कहा है--
हाथों में थमा
सृजन की लेखनी
नेह सियाही
भर यूँ छिटकाई
उठी लहर
भीगा-भीगा अंतर
तिरते शब्द
उड़े क्षितिज तक
मिलन हुआ
धरा से गगन का
रच ली मैंने
फिर नई कविता.
-----
कमला जी को बधाई आपको नमन।🙏🏻🙏🏻

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत सुन्दर चोका है । हमारे गुरुवर और अग्रज कम्बोज जी के लिए समर्पित यह चोका भावपूर्ण तो है ही, अक्षरशः सत्य भी है । सादर नमन!

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

हीरे की कद्र केवल जोहरी ही जानता है! कमल जी आप एक नायाब हीरा बन चुकी है और हम सब अभी तराशे जा रहे हैं। धन्यभाग्य जो आप जैसे उच्चकोटि के लेखकों का सान्निध्य मिल रहा है और काम्बोज भाई साहब की छत्रछाया में सीखने,पनपने का अवसर मिल रहा है। आप दोनों को सदर प्रणाम और शिक्षक दिवस की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं!

राहुल लोहट ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना जी,कमाल आपकी लेखनी और जिनको आपने ये प्यारी सी रचना समर्पित की है,हमारे चहेते विनम्रता के सागर,स्नेह-सरिता गुरु रामेश्वर कम्बोज जी तो पूरे संसार में अनोखा है।जिन्दगी के हर मोड़ पर उनकी आशीर्वाद सदैव प्राप्त हुआ है।हमारे गुरु रामेश्वर जी अमूल्य व अतुलनीय व्यक्तित्व के स्वामी है।बारंबार चरणस्पर्श जी।।😍😍😍😍😍😍😍😍😍😍😍😍💐💐💐💐💐💐🌺🌺🌺

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

अत्यंत सुंदर भाव-सरिता! बहुत ही मनमोहक चौका आ. कमला जी!

~सादर
अनिता ललित

Krishna ने कहा…

अत्यंत सुंदर सुच्चे भावों से सजी अद्भुत रचना। बहन कमला जी हार्दिक बधाई।
हमारा सौभाग्य है कि हमें भाई काम्बोज जी जैसे गुरु मिले। जिनकी प्रेरणा से हमारी लेखनी वह सब लिखने लगी जिसकी कभी स्वप्न में भी कल्पना नहीं की थी। आपको मेरा सादर प्रणाम।

Dr. Purva Sharma ने कहा…

बहुत ही सुंदर एवं भावपूर्ण चोका कमला जी
हार्दिक शुभकामनाएँ
हमें भी काम्बोज सर ने ही लेखनी थमाई है | उन्होंने कई लोगों को लिखने की प्रेरणा दी है और सही राह भी दिखाई है | उनके जैसा गुरु मिलना सौभाग्य की बात है | गुरुवर को नमन ......

Satya sharma ने कहा…

बहुत ही सुंदर भाव । सक्छ में भैया जी ने हाथ पकड़ कर चलना सिखाया ।
हम सभी सदा ऋणी रहेंगे ।
सादर प्रणाम आप दोनों को 🙏🏻🙏🏻

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत सुन्दर, भावुक और कोमल चोका. काम्बोज भाई ने हाथ पकड़ कर हम सभी को लिखना सिखाया, हम सभी के गुरु हैं भैया. सादर प्रणाम भैया को. हम सभी के भाव को आपने शब्द दिए, भावपूर्ण चोका के लिए बधाई कमला जी.