दीपोत्सव-2013 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दीपोत्सव-2013 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 3 नवंबर 2013

बाधाओं में मुस्काना,

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
1
तुम दीपक
मन के ,जीवन के
तुम  हो मेरी आशा
तुम न होते
लिख न पाते हम
जन्मों की परिभाषा ।
2
दीपक बन
राह दिखाते जाना
बाधाओं  में  मुस्काना,
पथ में मिलें
उनको गिराकर
आगे न बढ़ जाना ।
3
ज्ञान -उजेरा
ढक लिया हाथों से
हे क्षुद्र साहित्यकार ?
'मैं-मै' का चढ़ा
जीवन में बुखार
इसे अब उतार ।
-0-
2- मंजु गुप्ता
1
मुडेरों पर 
घर -दर -अटारी 
चौराहों - नदियों  पे 
जलाएँ दीप 
समता - सद्भाव का 
विश्वबंधुत्व हेतु ।
-0-
3-रेनु चन्द्रा
1
ज्ञान के दीप
घर घर जलाएँ
अज्ञानता हो दूर
मन के दीप
राहों में सजा, प्यार 
बरसे भरपूर ।
2
मुस्कान भरो
फूलों की महक हो
दीपों की पाँत जले
रोशन करो
जन -जन के मन
प्रेम उत्साह पले ।

-0-

माटी का तन


1-अनिता ललित 
1
माटी का तन
भर नेह अपार
पावन मन,
जब जगे जीवन
हो जग उजियार !
2
मंत्रोच्चारण- 
बच्चे की  किलकारी
घर में गूँजे! 
नयन दीपमाला
ले खुशियाँ चहकें !
-0-
2-तुहिना रंजन
1
एक अकेला  
कर्म -पथ चलता  
माटी का दिया  
जूझा  अन्धकार से  
हो ज्ञान-उजियार  
2
सूर्य- समान  
तेज से दमकता  
आस का दिया  
देता रहा सम्बल  
करता  दु:- त्राण ।
-0-
3-पुष्पा मेहरा
1
दीप-ज्योति से-
निर्लिप्त बने हम
गिरि-मन हो
कल्मष -द्वेष हरें
जड़ता-व्याधि टरे।
2
हर आँगन
जला दें ज्ञान-दीप
अज्ञान हटे
तेजस्वी बन जिएँ
ज्ञान-रश्मि चमके।
-0-
4-डॉ सरस्वती माथुर
1
पर्व अनूठा
मधुर रस घोले
ज्ञान ज्योति से
आस्था की ज्योति जला
रोशनी को टटोले l
-0-
5-ऋता शेखर  'मधु'
1
लौ ने डराया
तम तिलमिलाया
दीप के तले
छुपा है चुपचाप
कर रहा प्रलाप ।
-0-
6-सुभाष लखेड़ा
1
स्नेह तेल के
ऐसे दीप जलाएँ
दिवाली पर
जो कभी बुझे नहीं
इस धरती पर ।
-0-
7-सुदर्शन रत्नाकर
1
झिलमिलाते
सितारे उतरते
टिमटिमाते
दीप बन जलते
वसुधा की गोद में
-0-
8- मंजु गुप्ता
1
दीपक  लौ में 
जले द्वेष- कालिमा 
दिव्य ज्योति - सी 
फैले रवि की  लाली  
छा जाए खुशहाली ।
2
क्रूर तम में 
दीप अवलियों से 
रौशन होती 
रजनी दिवाली की 
लगती महारानी । 
3
युगों - युगों से 
मना रहे दीवाली 
आस्था का दीप 
तकनीकी युग  में 
थाती को  है ढो रहा ।
4
दीपों की लौ में 
जल - जल के जले 
मन  मलिन 
उजाला हो भीतर 
 करें ऐक्य जग से ।
5
प्रकाशित हो  
 कर्म की दीप शिखा 
हो ज्योतिर्मय 
फिर  जग सकल 
 मिले सभी को शान्ति ।
-0-


शनिवार, 2 नवंबर 2013

यादों के दीप

1- अनीता ललित 
1
छोड़े अगर 
दुश्मनी के पटाख़े 
तन-मन जलेगा!
घुल जाएगा 
भीतर ही भीतर 
होगा जीवन धुआँ 
2
माटी का दीया
गर ईर्ष्या में जला
सिर्फ़ जला, न जिया!
दिल में भर
जो नेह-घूँट पिया 
जगमग ही किया!
-0-
2-तुहिना रंजन
1
दीपों की  लड़ी  
जगमग आँगन  
चमके घर-द्वार  
सजी रंगोली  
रंग मनभावन  
शुभ हो आगमन ।
2
 प्रतीक्षारत  
दो अश्रुपूर्ण नैन  
साँस लड़ी जोड़ते   
क्षीण होती लौ   
बुझ रहा ये दिया  
कर भी दो उद्धार  
-0-
3- पुष्पा मेहरा
1
 सजाते रहें
 सदा दीपों की लड़ी
 हिले,झिलमिलाए,
 टूटे न कभी
 बिखरा दें रोशनी
 सजे भाल-भारती।
2
 माटी-तन ले
अमा की देहरी पे
त्याग-सर डूबेंगे,
झुकेंगे नहीं
तेल औ बाती बन
आत्मोत्सर्ग करेंगे।
-0--
4- शशि पुरवार
1
यादों के दीप
फिर हिय में जले
सलोने उजियारे ,
भीगी चाँदनी
खिल उठा चाँद
मन  के अंधियारे ।
2
अखंड दीप
जीवन ,पथ पर
हाँ ,माँ ने  जलाया,
संस्कारों की लौ
महकता आशीष
तिमिर को मिटाया  
-0-
5-कृष्णा वर्मा
1
माटी -पुत्र ने
कपास की बेटी को
जब गले लगाया
प्यार में भीगी
तिल-तिल दमकी
उजियारा फैलाया।
2
खुशियाँ झरीं
जगमग दीपों ने
निशा की माँग भरी,
ऐसा लगता
उतरी धरती पे
रोशनियों की परी।
-0-
6-सुभाष लखेड़ा 
शुभकामना 
दिल में रोशनी हो 
वाणी में चाशनी हो 
यही भावना 
दीपों में हो हमारे
फैलेंगे उजियारे ।
-0-
 7- डॉ सरस्वती माथुर
1
दीपक जले
मन हुआ रोशन
टँगी बंदनवार 
देहरी पर
 खुशनुमा नज़ारा
दीपावली त्योहार l
2
अँधेरी रात
झिलमिल करती
दीपों की फुलकारी
रंग बिरंगी
बुनकर के ज्योति
छाई छटा निराली l
-0-
8- सीमा स्‍मृति
1
है इंतजार
मिटे ये अंधकार
बढ़ता जाए प्‍यार
आतंकी साए
इंसानियत देख
काँपे, सर झुकाए ।

-0-

इक दीप नया लिख दूँ

1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा 
1
हों खुशियों की खीलें 
दम-दम-दम दमके 
हर मन , मुख ,कंदीलें |
2
प्रिय ! प्रीत लगे प्यारी 
दीपक - बाती हम 
ये दीवाली न्यारी |
3
यूँ मधुर रहें घड़ियाँ 
मुख मुस्कानों की 
खिलती हों फुलझड़ियाँ |
4
मैं गीत नया लिख दूँ 
दें वर जग जननी 
इक दीप नया लिख दूँ |
-0-
2-कृष्णा वर्मा
1
झिलमिल जगमग लड़ियाँ
बन्दनवार हँसें
खुशियों की फुलझड़ियाँ।
-0-
3-डॉ सरस्वती माथुर
1
झिलमिल करता तारा
काली रातों में
दीपों का उजियारा l
-0-
4- ज्योतिर्मयी पन्त
1
छम- छम लछमी बरसे
सबके घर खुशियाँ
कोई अब  ना तरसे .
2
सज दीपों की लड़ियाँ
बन्दनवार बँधे
झरती  हैं फुलझड़ियाँ.
 -0-
5- सुनीता अग्रवाल
1
हरना  पथ का हर तम
बन कर दीपक तुम
बाती बन जाएँ बाती हम 
-0-
6- शशि पुरवार
1
फिर आयी दीवाली
झिलमिल दीप जले
झूम रही हर डाली .
2
कण- कण  है में बिखरी 
दीपों की आभा
यह रजनी भी निखरी .
3
रंगोली द्वार खिली 
राह तके लड़ियाँ
घर खुशियाँ आन मिली।
4
गूँज रही किलकारी
झूम रही बगिया
ममता भी बलिहारी

-0-