
सपना मांगलिक
1
सबने ही ठुकराया
गम बस अपना था
साथ उसे ही पाया ।
2
आखिर कुछ तो कहता
रह न सही दिल में
इन आँखों में रहता ।
3
पाकर सब खोती हूँ
तन्हा रातों में
अक्सर मैं रोती हूँ ।
4
पल भर का डेरा है
कल उड़ जाना है
जग रैन बसेरा है ।
5
दिल कहता बेचारा
मैं कुछ नादाँ हूँ
थोड़ा- सा आवारा ।
6
नजरों के पैमाने
आये लौट यहीं
जो कल थे मयखाने ।
7
मेरा दिल बहला दे
आज डुबा खुद में
मुझको पार लगा दे ।
8
अब कुछ न मुझे भाए
बस पन्थ निहारूँ
काश कि तू आ जाए।
9
गीत मधुर गाएँगे
इश्क मिटा दे तू
हम प्रीत निभाएँगे ।
10
वो दर्द भुलाता है
लोग समझते हैं
मस्ती में गाता है ।
11
भूल गए मयखाने
पी आये जबसे
नजरों के पैमाने ।
12
माँग रही कुछ रब से
उस भोलेपन ने
दिल जीत लिया जबसे ।
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