1-पुष्पा मेहरा
1
जन्मे हैं श्याम
नाच रहे हैं मोर
करें भेंट वे पंख,
बाँस - वनों में
मन ही मन कहें-
मुरली तो बनूँ मैं ।
2
झूमा कदम्ब
लचकतीं डालियाँ
कर रहीं नमन,
धुले - पत्र ले
भक्ति-भाव -भरा वो
बजा रहा मँजीरा ।
3
प्रसन्न मन
आए हैं घनश्याम
बजाएँगे बाँसुरी,
रचेगा रास
हरषेगी राधिका
थिरकेंगी गोपियाँ ।
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2-कृष्णा वर्मा
1
श्याम सलोने
आनन छवि ढाँपे
कुंतल मेघ
दरस को तरसें
ग्वाल गोपियाँ देख।
2
ओ वंशीधर
हुए निठुर तुम
क्यों कर भूले
तट पे राधा रोए
प्रतीक्षा में अकेले।
3
नंद किशोर
श्याम चित्तचोर क्यों
जिया चुराया
राधा भई दीवानी
निज होश गँवाया।
4
ओ पीताम्बर
चुरा लिया रे चित्त
हुई दीवानी
करें नैन चपल
मन में हलचल।
5
कुटिल केश
कुंडल -किरीट ये
तुझ पे सोहे
जब बजाओ वंशी
ये राधा सुध खोए।
6
रास रचाए
गोपियाँ संग कान्हा
ज्यों बाल खेलें,
निर्लिप्त निर्विकार
निज प्रतिबिंब से।
7
कैसी बावरी
साँवरे की बाँसुरी
नेह लगाया
होंठों से लगने को
सीना भी छिदवाया।
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