सोमवार, 16 मार्च 2015

रिश्ते आँधी हैं



रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
1
तन-मन सब दे डाला
बदले में पाया
इक ज़हर-भरा प्याला ।
2
हर रोज़ दग़ा देंगे
रिश्ते आँधी हैं
बस आग लगा देंगे ।
3
इल्ज़ाम सभी पाए
अपनों के  हाथों
हमने धोखे खाए ।
4
हम यूँ भी कर लेंगे
दोष तुम्हारे भी
अपने सिर धर लेंगे ।
-0-

11 टिप्‍पणियां:

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

बेहद खूबसूरत माहिया

Amit Agarwal ने कहा…

वाह काम्बोज सर! ग़ज़ब का लिखा है!

ज्योति-कलश ने कहा…

आज के रिश्तों की सच्चाई बयाँ करते बहुत भावपूर्ण माहिया !

हम यूँ भी कर लेंगे
दोष तुम्हारे भी
अपने सिर धर लेंगे !!..बेहद ख़ूबसूरत !!!

सादर नमन के साथ
ज्योत्स्ना शर्मा

Rekha ने कहा…

मर्मस्पर्शी सुन्दर माहिया के लिए हार्दिक बधाई ।
सादर
रेखा रोहतगी

सुनीता अग्रवाल "नेह" ने कहा…

behad khubsurat mahiya sabhi :)
तन-मन सब दे डाला
बदले में पाया
इक ज़हर-भरा प्याला ।
2
हर रोज़ दग़ा देंगे
रिश्ते आँधी हैं
बस आग लगा देंगे ।

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…


क्या कहें! भैया जी! दर्द की इतनी ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति!
बस निःशब्द हैं हम …

~जलती लकड़ी से रिश्ते
दूर हों तो धुआँ देते हैं
पास हों जला देते हैं...~

~सादर
अनिता ललित

rbm ने कहा…

rishton ki asaliyat batate aurunako nibhane ki kala sikhate sabhi mahiya yathart ko saheje hain.bhai ji apko badhai.
pushpa mehra.

अनाम ने कहा…

जलती लकड़ी से रिश्ते
दूर हों तो धुआँ देते हैं
पास हों जला देते हैं...
बहुत ही भावपूर्ण माहिया !
कंबोज भाई बहुत बहुत बधाई !
Dr Saraswati Mathur

Shashi Padha ने कहा…

हम यूँ भी कर लेंगे
दोष तुम्हारे भी
अपने सिर धर लेंगे --- हर माहिया में शब्दों से ढका एक दर्द छिपा और मन को भिगो गया | बधाई आपको |

शशि पाधा

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

हर रोज़ दग़ा देंगे
रिश्ते आँधी हैं
बस आग लगा देंगे ।
कितना दर्द भरा है इस कटु सत्य में...| सारे माहिया जैसे दिल में उतर जाते हैं शब्द-ब-शब्द...| बस एक शब्द मेरा भी इनके लिए...वाह!

Jyotsana pradeep ने कहा…

तन-मन सब दे डाला
बदले में पाया
इक ज़हर-भरा प्याला ।behad marmik v khoobsurat bhi..sadar naman ke saath -saath badhai .