रविवार, 9 फ़रवरी 2020

900-ताँका



डॉ.पूर्वा शर्मा 
तू गर्म गुड़
मैं बिखरे तिल-सी,
चिपकी-घुली
सिमटे दोनों ही यों
खस्ता गजक हो ज्यों।
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11 टिप्‍पणियां:

Rohitas ghorela ने कहा…

स्वाद आ गया

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

वाह,बहुत सुंदर ताँका,प्रेम के अद्वैत की मिठास को अभिव्यक्त करता सर्वथा अभिनव बिम्ब।बहुत बहुत बधाई डॉ. पूर्वा जी।

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

सुंदर,नूतन अभिव्यक्ति!बेहतरीन,पूर्वा जी बधाई।

Sudershan Ratnakar ने कहा…

अभिनव प्रयोग बहुत सुंदर ताँका ।बहुत बहुत बधाई पूर्वा जी ।

अनिता मंडा ने कहा…

सुंदर प्रयोग

Jyotsana pradeep ने कहा…

सुन्दर...मन में मिठास घुल गई, बहुत-बहुत बधाई पूर्वा जी !

Krishna ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत तांका... हार्दिक बधाई पूर्वा जी।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

गज़ब. इतना खूबसूरत. कितना प्यारा बिम्ब और एहसास. बधाई पूर्वा जी.

Dr. Purva Sharma ने कहा…

आप सभी के सुंदर एवं प्रोत्साहित करते शब्दों ने ऊर्जा भर दी।
सभी को हृदयतल से बहुत-बहुत धन्यवाद

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत खूबसूरत ताँका,बधाई पूर्वा जी।

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

बहुत सुन्दर नवीन भाव से पूर्ण तांका रचा है पूर्वा जी |हार्दिक बधाई |