शुक्रवार, 2 सितंबर 2022

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 डॉo जेन्नी शबनम

1


हे गंगा माई

केहू नहीं हमर

कौना से कहू

सुख-दुख अपन

कैसे कटे सफ़र।

2

हे गंगा माई

मन बड़ा बिकल

देख के छल

छुपा ल दुनिया से

कोख में अपन।

3

हे गंगा माई

हमर पुरखा के

तू समा लेलू

समा ल हमरो के

तोरे जौरे बहब।

4

तू ही ले गेलू

हमर बाबू-माई

भेंट करा द

निहोरा करई छी

दया कर हे माई।

5

पाप धोअ लू

पुन सबके दे लू

देख दुनिया

गंदा कर देलई

कइसन हो गेलू।

-0- बिहार में तिरहुत प्रमंडल के वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढी, शिवहर जिला तथा दरभंगा प्रमंडल के समस्तीपुर तथा दरभंगाके पश्चिमी भाग में एक करोड़ से ज्यादा लोगों द्वारा बज्जिका बोली जाती है।(विकिपीडिया)

7 टिप्‍पणियां:

Ramesh Kumar Soni ने कहा…

तू ही ले गेलू

हमर बाबू-माई

भेंट करा द

निहोरा करई छी

दया कर हे माई।
पहली बार इस बोली में ताँका पढ़ने को मिला।इस प्रयास के लिए आपको बधाई और प्रोत्साहन के लिए इस पटल के संपादक जी का आभार।
उपरोक्त ताँका को जहाँ तक समझा बेहतरीन अर्थ समेटे हुए है।
शुभकामनाएँ।

भीकम सिंह ने कहा…

बेहतरीन ताँका, बज्जिका का मैथिली से भी कुछ रिश्ता है ? हार्दिक शुभकामनाएँ ।

Rashmi Vibha Tripathi ने कहा…

बहुत ही सुंदर ताँका।
हार्दिक बधाई आदरणीया।

सादर

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

वाह! बहुत सुंदर रचनाएँ!

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

वाह ! क्षेत्रीय बोली की अपनी एक अलग ही मिठास होती है | आनंद आ गया | बहुत बधाई

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

आप सभी ने मेरे इस प्रयास की सराहना की है, आभार!
भीकम जी, बज्जिका बोली का क्षेत्र मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर आदि है. मैथिली इससे सटे हुए क्षेत्र में बोली जाती है, तो काफी मिलता हुई भाषा है.

Krishna ने कहा…

बहुत सुंदर ताँका...हार्दिक शुभकामनाएँ।