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शुक्रवार, 30 मई 2014

शेष को बचाना है,

डॉ अनिता कपूर (अमेरिका कैलिफोर्निया)
1-सेदोका
1
ले जाओ सब
वो जो तुमने दिया
शेष को बचाना है,
सँभालने में
आधी चुक ग हूँ
भ्रम को हटाना है
-0-
2-ताँका
1
रो रही रात
बुला रही चाँद ओ
तारों को भी
डरती- सिसकती
अमावस्या है आज
2
सागर से ही
पानी ले -लेकरके
बादल आया
बरस गया पर
प्यासा रहा सागर
3
रोज़ जलाता
सूर्य का ताप मेरे
मन का अहं
उग जाती फिर से
ई  फ़स्लें  रिश्तों की
4
कह जो दिया
चले आओ अब तो
चाहिए मुझे
तपती धरा पर
दो ही  बूँद  हमारी
-0-







शनिवार, 19 अप्रैल 2014

मन की सेज

डॉ अनिता कपूर
1
सोई यादों के
करवट लेते ही
चरमराई
फिर मन की सेज
मुट्ठी में बंद रेत ।
2
आकाशबेल
शतरंज का खेल
सृष्टि की आँख
साफ देख रही है
ब्रह्मांड का ये खेल।
3
सिद्ध तो करो
देह और प्राण का
स्‍पर्श का रिश्‍ता
फिर लिखो अपनी
अलग परिभाषा ।
4
ओस लिपटी
और हरसिंगार
की खुशबू में
रची बसी वो बातें
काते है मन मेरा।
5

कुछ लकीरें
किस्मत ने मिटाईं
कुछ लकीरें
जिंदगी ने कुरेदी

हथेली रही खाली ।

सोमवार, 27 जनवरी 2014

अंदर दागदार

ताँका
डॉ अनीता कपूर
1
ये जो अपने
बनते हैं यूँ ख़ास
ओढ़े चादर
ऊपर से उजली
अंदर दागदार ।
2
चारों तरफ
उग आए है रिश्ते
गिरगिटों-से
संवेदनाओं-लदी
लताएँ मर रही ।
 -0-
सेदोका
डॉ अनीता कपूर
1
बंदूकें हो या
कागज़ और स्याही
ईमान भयाक्रांत
देखके स्वार्थी
इरादों की शक्ल में
गोली व कलम को
2
अपना कद
गर लम्बा करते
मेरे कन्धे के बिना
तय है यह-
आज भी हमारे वो
रिश्ते रेशमी होते
3
रिश्तों की घड़ी
आज भी दीवार पे
यूँ ही है सूनी खड़ी
स्वार्थी सुइयाँ
लम्हे समेट भागीं
घायल हुई घड़ी
4
मानवीयता
बनी है कब्रगाह
घनघोर चुप्पी की
चादर ओढ़े
रिश्तों ने बेशर्मी के
टाँकें लगा दिये हैं

-0-

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

मन में विष भरा



ताँका    
1-पुष्पा मेहरा              
1
सूरज तपे
चाँद को प्रकाश दे
कृतघ्न चाँद
जब भी मौका पा
सूर्य को ही छुपाए
2
 मौन हो खड़ी
 मगन बक-पंक्ति
 मन - लाप
 केवल मीन-राग
 न तो बाजा न ताल ।
3
 वाणी अमृत
 मन में विष भरा
 प्यार में अंधा
 भेद न जान पाया
 धोखे पे धोखा खाया ।
-0-
2-डॉ अनीता कपूर
1
 ये जो अपने
बनते हैं यूँ ख़ास
औढ़े चादर
ऊपर से उजली
अंदर दागदार ।
2
 चारों तरफ
उग आए है रिश्ते
गिरगिटों -से
संवेदनाओं -लदी
लताएँ मर रही ।
-0-
3-डॉ सरस्वती माथुर
 1
परायापन
घनी पीड़ा दे गया
मन में एक
जर्द- सा दर्द देके
नश्तर चुभो गया !
2
स्वार्थघृणा का 
 देखो तो  बोलबाला  
आया समय
है कितना  निराला  
गैर से  रिश्ता आला!
-0-

गुरुवार, 9 मई 2013

ताँका



डॉ अनीता कपूर
1.
उगायें, फिर  
रौशनी की फ़सल
चीर अँधेरा
बुनकर चटाई
ढकें खुली खिड़की।
2
हाँ, बेहयाई !
बिकने लगी आज
दुकानों पर
हया- शर्म से खुद
शर्मसार हुई है ।
3
यादों के गीत
जीवन -संगीत से
करो अलग
जिंदगी रेत नहीं
यादें सोख न पा

4
जीवन -शक्ति
फिर हुई सजीव
मौन मुखर 
बन गुलमोहर
पहन गुलमोहर ।
5
खड़ा अकेला
दृढ़ है जिजीविषा
जितना तपे
उतना ही निखरे
गुलमोहर तरु ।
-0-

सोमवार, 25 मार्च 2013

जीवन के विविध रंग


डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
 1
वन्दना परगनिहा
अरे वसंत
कैसी करो ठिठोली
लिए घूमते
ये पवन निगोड़ी
अनहोनी न हो ले ।
 2
न मान करो
मेरे सखा वसंत
कहाँ बसाऊँ
तुम्हीं कहो तो ,मन
बसे हैं मेरे कन्त !
3
अरे फागुन
क्या गुनूँ तेरे गुन
सरस मन
गुनगुना ही उठे
रुत हुई मगन ।
4
सुनो रे पिया
अजब जादूगर
होरी मचाई
न रंग न गुलाल
हो गई मैं तो लाल ।
-0-
2-डॉ अनीता कपूर
1
हुई रंगीली
मन की रे पत्तियाँ
होली का वृक्ष
अब तो आओ कान्हा
मैं हुई राधा, मीरा  ।
2
भीगा मनवा
रहा सूखा तनवा
बाट निहारूँ
अब तो आओ कान्हा
राधा रूप हुई मैं
3
रंगो की बातें
सुनकर डोल गया
होली में मन
पुकार रही राधा
कान्हा का रूप  धरे
-0-
3-कृष्णा वर्मा
1
टूटा सयंम
रचा उत्सव फाग
प्रीत है अंध
है साँसों में कस्तूरी
फैल गई सुगंध।
2
बरसी प्रीत
रंगों भरी फुहार
फाग ले आया
टेसू गुलमोहर
वसुधा का शृंगार।
3
मौन अधर
आँखों-आँखों में बात
गुलमोहर
पलाश, गुलाब के
हुए रक्तिम हाथ।
4
रस भीने से
छंद कलम लिखे
मन-पन्नों पे
प्रीत रंग में रँगी
मौन गोरी लजीली।
5
स्मृति के रंग
ह्रदय पटल पे
खेले फाग
याद पिया की आए
सुलगे तन आग।
-0-
4 - मंजु गुप्ता 
1
प्यार का रंग 
चढ़ा तन - मन पे
स्पर्शों की वर्षा 
सपनों के नीड को 
आबाद करा गई .
-0-