बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

कुछ दीप जला जाना





1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1
इतना उपकार करो
मेरी भी नैया
प्रभु ! भव से पार करो ।
2
पग-पग पर हैं पहरे
बख्शे दुनिया ने
हैं ज़ख़्म बहुत गहरे ।
3
हाँ ,साथ दुआएँ थीं
दीप जला मेरा
जब तेज हवाएँ थीं ।
4
खिल उठती हैं खीलें
स्नेह भरे दीपक
ख़ुशियों की कंदीलें ।
5
कुछ काम निराला हो
सच की दीवाली
अब झूठ दिवाला हो ।
6
है विनय विनायक से
काटें क्लेश कहूँ
श्री से ,गणना़यक से ।
7
सुनते ना ,कित गुम हो
अरज यही भगवन
निर्धन के धन तुम हो
8
चाहत को नाम मिले
मनवा को तुम बिन
आराम न राम मिले ।
8
हैं सुख-दुख की सखियाँ
जीवन-ज्योत हुईं
तेरी ये दो अँखियाँ ।
9
दिन-रैन उजाला हो
दीप यहाँ मन का
मिल सबने बाला हो ।
 
-0-
2-रचना श्रीवास्तव
1
हर ओर दिवाली है
घर तो सूना है
जेबें भी  खाली हैं ।
2
चौखट पर दीप जले
मन अँधियारा है
इस नीले गगन -तले ।
3
तुम आज चले आना
मन की  चौखट  पर
कुछ  दीप जला  जाना ।
4
दो दिन से काम नहीं
आज  दिवाली है
देने को दाम नहीं
5
तन को  आराम नहीं
दर्द  गरीबों का
सुनते क्यों राम नहीं
-0-
3-शशि पाधा
1
यह पावन वेला है
धरती के अँगना
खुशियों का मेला है
2
त्योहार मना लेंगे
रोते बच्चे को
हम आज हँसा देंगे
3
दीपों की माल सजी
मंगल गीत हुए
ढोलक की थाप बजी
4
शुभ शगुन मना लेना
सूनी ड्योढी पर
इक दीप जला देना |
 5
तन- मन सब वार गए
अम्बर के तारे
दीपों से हार गए |
-0-
4-डॉ सरस्वती माथुर
1
रातें तो काली हैं
मन हो रोशन तो
हर रात दिवाली है ।
2
दीपों की लड़ियाँ हैं
जगमग आँगन में
जलती फुलझड़ियाँ हैं ।
3
नैनो में दीप जले
नभ के चंदा सा
आ जाना शाम ढले।
-0-
5-कृष्णा वर्मा

1
दीपों की माल जली
खुशियाँ सज-धज के
डोलें हैं गली-गली।
2
लौ का लौ हाथ गहे
कटि लचका-लचका
पवन संग नाच करें।


मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

पंजाबी भाषा



डॉ हरदीप  सन्धु

छुट्टी का दिन .......... तपती दोपहर  ..........सिडनी की सड़कों पर कारों की भरमार। तेज़ धूप के कारण गर्मी काफ़ी ज्यादा हो  गई थी।  हमने कार के शीशे (काँच) बंद कर , ए. सी. चला लिया था। ट्रैफ़िक की बत्तियाँ पार करते हुए हम अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहे थे। एक लाल बत्ती पर आ करके हमारी कार रुकी। तभी पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करने के लिए हरी बत्ती का संकेत हुआ।

          सर पर केसरी पगड़ी तथा सफ़ेद कुरता -पजामा पहने एक सज्जन हमें सड़क पार करता हुआ दिखाई दिया।  बहुत -सी और कारों को छोड़ता हुआ वह  हमारी कार के निकट आ करके रुक गया।  उसके  चेहरे पर परेशानी साफ़ झलक रही थी। मुझे  चुनरी ओढ़ी देखकर या यह सोचकर कि कार चलाने वाले जवान को कौन सी हिंदी /पंजाबी समझ आने वाली है  ..........उसने मेरी तरफ़ वाली कार की खिड़की को खटखटाया। उसकी बात सुनने के लिए मैंने शीशा खोला। "पारकली गुरु्द्वारा कहाँ है ? उधर को जाने का कौन- सा रास्ता है ? यहाँ से कितनी दूर है ?" एक ही साँस में उसने सवालों की बौछार कर दी।
    बिना समय व्यर्थ किए और बिना यह सोचे कि पूछने वाले को पंजाबी में बोला  गया समझ भी आएगा या नहीं  ..........मैं गुरुद्वारे का रास्ता समझाने लगी।  मेरे बेटे ने वहाँ से गुरुद्वारे की सही दूरी और वहाँ पहुँचने के लिए अनुमानित समय बता दिया। हम माँ -बेटा पंजाबी भाषा में बात कर रहे थे " अच्छा -अच्छा   ..........बस अहिओ सड़के -सड़क तुरे जाणा है  ..........नक दी सेधे ……बस समझ गया। " चेहरे पर मुस्कान बिखेरे अब वह सज्जन भी पंजाबी में बात कर रहा था। हमने उसकी हाँ में हाँ मिलाई।  इतने में हरी बत्ती हो गई और हम अपने -अपने रास्ते चलते हुए।
            वह अनजान राही तो कब का गुरुद्वारा पहुँच, सुख -शांति की प्रार्थना करके कहीं सकून से बैठा होगा। मगर उसकी पल भर की मुलाकात मुझे अब तक परेशान किए जा रही है  कि पंजाबी भाषा बोलने में सक्षम  होते हुए भी उसने मुझसे हिंदी में बात की। क्या बहुत से और लोगों की तरह उसे भी यही लगता है कि अगर पंजाब के शहरी लोग हिंदी /अंग्रेजी में बात करना अपनी शान समझते हैं । उनको लगता है कि ऐसा करने से वह ज्यादा पढ़े -लिखे नज़र आते हैं , तो यह तो है ही फिर विदेश। कितनी हीन -भावना के शिकार हैं ऐसे लोग जिनको अपने असल होने पर भी शर्म आती है।

पंजाबी भाषा-
बिना पतवार के
डोलती नैया।

       


रविवार, 12 अक्टूबर 2014

यादों में रहती हूँ



रचना श्रीवास्तव
1
अब  चाँद निकल आया
तुम  घर आ जाओ
मन मेरा  घबराया ।
2
नैनो में रहते हो
मेरे स्वामी तुम
साँसों में बहते हो  
3
बस इतना कहती हूँ
हर पल तेरी ही
यादों में रहती हूँ
4
मै लाख जनम पाऊँ
तेरी ही बन के
तेरे ही  घर आऊँ ।
5
तू मेरा राँझा है
तेरा- मेरा तो
सुख- दुख सब साँझा है ।
6
नदिया तूफानी है
बहती रहती जो
वो प्रेम  कहानी है ।
-0-


शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

तुम हाथ बढ़ा देना



आज की पोस्ट में अनुपमा त्रिपाठी के स्वर में माहिया  पढ़ने के लिए  12 माहिया   
को क्लिक कीजिए ।

1-डॉo सुधा गुप्ता
1
तुम हाथ बढ़ा देना
करुणाकर !सुन लो
तुम पार लगा देना 
2
मन को अब चैन नहीं
आँखें रीती हैं
होठों पर बैन नही।
3
अमरस अँगनाई में
कोयल कूक रही
अब तो अमराई में ।
-0-
2-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
1
रुत ये वासंती है
चरणों में हमको
ले लो ये विनती है
2
दो बूँद दया बरसे
हम भी  हैं तेरे
फिर कौन भला तरसे ।
3
देरी से आना हो
आकर जाने का
कोई  न बहाना हो 
-0-
3-डॉ भावना कुँअर
1
तुम बरसों बाद मिले
मन के तार छिड़े
सारे  ही ज़ख़्म सिले।
2
 जीवन की रीत रही
सच्ची प्रीत सदा
इस मन की मीत रही
3
बोलो कब आओगे ?
उखड़ रही साँसें
सूरत दिखलाओगे ?
-0-
4-रामेश्वर काम्बोज
1
बादल ये बरसेंगे ।
मन में धीर धरो
जीवन-पल हरसेंगे ।
2
पग-पग पर शूल बिछे ।
रुकना कब सीखा !
मंज़िल पर  फूल बिछे
3
तुम मेरी पूजा हो
तुमसे भी प्यारा
कोई ना दूजा हो