गुरुवार, 18 मई 2017

761

1-जुगलबन्दी माहिया
सुनीता काम्बोज
1
 लाए अंगूर पिया
मैं हूँ शहजादी
तुम हो लँगूर पिया।
 0
सहता बारहमासी
ताजी दाल मिली
रोटी मिलती बासी।
2
ये अच्छी बात गढ़ी
अपनी जोड़ी है
चावल के साथ कढ़ी।
 0
शीशा  देखा करना
तुम हो थार पिया
हम हैं मीठा झरना।
3
आ प्यार सिखाऊँगी
थानेदार बुला
फिर जेल कराऊँगी।
 0
मुझसा ना पाओगी
ऐसा करके तुम
सजनी पछताओगी।
4
चिपकी है आज गली
जानम तुम लगती
गुड़ की बस एक डली ।
 0
 मैं गुड़ तुम शक्कर हो
हारोगे हमसे
मत ऐसे  टक्कर लो ।
 5
जिसका साजन लम्बा
देखूँ तो लगता
वो बिजली का खम्बा ।
 0
जीना दुश्वार लगे
मेरी सजनी तू
बिजली के तार लगे ।
6
जिसका सजना मोटा
लुढ़का ही जाए
ज्यों बिन पेंदी लोटा
लोटे में पानी है
टेढ़े दाँत वही
इस दिल की रानी है।
6
सजना है दिलवाला
लाल पजामा है
पहना कुर्ता काला
 0
गालों पर है लाली
नखरे खूब करे
बस मेरी घरवाली ।
7
तुझ पर मैं मरता हूँ
पर तेरी माँ के
डंडे से डरता हूँ
 0
सहलो ये मार पिया
संग चली तेरे
छोड़ा घर- बार पिया
8
छोड़ो तकरार,चलो
अपनी गाड़ी में
लेकर बाजार चलो
 0
क्या आफत आई है
सेल लगी बीवी
थैले भर लाई है
9
थोड़ा तो डरते हो
बीवी के आगे
तुम पानी भरते हो
 0
हम तो बेचारे हैं
पत्नी के आगे
ईश्वर भी हारे हैं ।
10
ये जेब हुई खाली
खूब खरीदारी
करती है घरवाली
 0
 इसमे भी क्या शक है
ये संसार सकल
बीवी का सेवक है ।
 11
 यूँ बहना अच्छा है
बीवी की हाँ में
हाँ कहना अच्छा है
 0
इतनी औकात नही
उसको समझाना
अब बस की बात नहीं ।
12
 घर पर बतलाऊँगी
तेरे रोगों का
उपचार कराऊंगी।
 0
की सेवा सरकारी
बाप दरोगा है  
भाई है पटवारी।
13
मत कर जोरा-जोरी
तुम हो सूत पिया
हम  रेशम की डोरी।
 0
घर की गाड़ी चलती
करने से पहले
तू माना कर गलती 
14
तुझ पर मैं मरता हूँ
पर तेरी माँ के
डंडे से डरता हूँ
0
अब काम नहीं दूजा
मैं दिन रात करूँ
पत्नी  की ही  पूजा 
-0-

2-ताँका - सतीश राठी 

1
गहरा ताल
बचा लिया है जल
बची है नदी
सूरज के ताप से
बची रेत होने से
2
बन बैठी है
सीने पर वजन
याद- पहाड़
कैसे भुला दूँ अब
बजाया जो सितार।
3
बरसात में
भीगती रही वह
समूची रात
आँसू बन बहे थे
बवण्डर बादल।
4
हँसते लब
दिल में घाव सा
खामोश मन
गम की नदिया में
कागज की नाव सा
5
नदी ने पूछा
प्रेम करते हो क्या
दिल ने कहा
प्रेम की कलकल
सीखी है तुमसे ही
-0-
सतीश राठी,आर-451, महालक्ष्मी नगर,इंदौर 452010
9425067204
rathisatish1955@gmail.com

-0-

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

760

1-ताँका
डॉ.सुषमा गुप्ता 
डॉ.सुषमा गुप्ता
1
जीवन तेरा
निर्मल जल- धारा
बहता रह
जग है तेरा सारा
हो विस्तार किनारा ।
2
माँ मत रूठो
मैं हूँ बालक प्यारा
आँखों का तारा
थोड़ा हूँ नटखट
पर राजदुलारा ।
-0-
2-(चोका)
सुनीता काम्बोज

 काली ये रात
काली चादर लिये
फिरती रही
रँगरेज न मिला
रँग दे इसे
लाल,नारंगी,हरा 
दर्पण  देखा 
अचरज क्यों हुआ
जानती थी वो
काले रंग पर क्या
चढ़ पाया है
कोई दूसरा रंग
 कुदरत ने 
उस पर सजाए
स्वर्णिम तारे
रात खिलखिलाई
तृप्ति मन ने पाई।

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मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

759

राजेश काम्बोज 
1.


कैसी मजबूरी है
मिलती ना छाया 
तरुवर से दूरी है ।
2.
पानी भर गागर से
प्यास बुझा लेगी
नदिया मिल सागर  से ।
3.
जीवन संगीत हुआ
यौवन आया तो
हर कोई मीत हुआ
4.
कलियाँ जब मुस्काई 
मेहनत माली की
रंगत फिर से लाई ।

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सोमवार, 10 अप्रैल 2017

758

1-विभा रश्मि
1
लहराता नद गाए 
तट हैं रेतीले
सोनल उनके साए 
2
झीलों का नीला जल
उतरे परबत  भी
जल में होती  हलच
3
बादल की नैया है
घूमे हैं परियाँ
पिय इंद्र खिवैया है
4
बरखा धीरे आना
जितना पास बचा 
सूनापन ले जाना
5
मीठी सी मनुहारें
छुटपन की यादें
वो भोली तकरारें
6
झिलमिल पानी चिलके
नदिया का दिल भी
खुश लाली से  मिलके
7
गोरी तो तितली है 
देखे साजन को
पनघट पे फिसली है
-0-
 2- सुनीता काम्बोज
1
हर आखर में तू है
चिट्टी से आती
गाँवों की खुशबू है ।
2
तारों की रात नहीं
तंग शहर में वो
गाँवों- सी बात नहीं
3
बस नेह बरसता है
गाँवो में अब भी
अपनापन बसता है ।

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गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

757

सुशीला शिवराण
1.
आज छज्जे पे
चहकी है ज़िंदगी
मुद्दतों बाद
खिल उठा एकांत
पाकर एक संगी।      
2.
आशा की डोरी !
तुम टूट न जाना
सोए सपने
ले रहे हैं जम्हाई
जीवन पलने में।
3.
टूटी भी नहीं
बात बनी भी नहीं
भ्रम ने पाले
जलती सड़कों पे
कुछ भीगे सपने।
4.
यूँ ही अक्सर
छू लेती हूँ अक्षर
तेरी यादों के
यूँ भी छुआ है तुझे
हाँ, यूँ जिया है तुझे।
       

-0-