-कृष्णा वर्मा
इस सृष्टि की
सृजनहार तुम
मेरा अस्तित्व
हो
जीवन -आधार
सरल साध्य
हो तुम ही आराध्य
तुम उजास
मेरी
उलझनों में
स्थिर विश्वास
डगमग क्षण में
हर स्पंदन
सदा ऋणी तुम्हारा
तुम्हीं प्रेरणा
भवितव्य मार्ग की,
तुमसे हैं
ये
रवि -चाँद- सितारे
है अकल्पित
तुम बिन संसार
तुम्हीं आरम्भ
और अंत तुम्हीं हो
तुम अनंत
परे सातों व्योम से
माँ तेरा
ही विस्तार।
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