शुक्रवार, 10 मई 2013

माँ


-कृष्णा वर्मा

इस सृष्टि की
सृजनहार तुम
मेरा अस्तित्व
हो जीवन -आधार
सरल साध्य
हो तुम ही आराध्य
तुम उजास
मेरी उलझनों में
स्थिर विश्वास
डगमग क्षण में
हर स्पंदन
सदा ऋणी तुम्हारा
तुम्हीं प्रेरणा
भवितव्य मार्ग की,
तुमसे हैं ये
रवि -चाँद- सितारे
है अकल्पित
तुम बिन संसार
तुम्हीं आरम्भ
और अंत तुम्हीं हो
तुम अनंत
परे सातों व्योम से
माँ तेरा ही विस्तार।
-0-

गुरुवार, 9 मई 2013

ताँका



डॉ अनीता कपूर
1.
उगायें, फिर  
रौशनी की फ़सल
चीर अँधेरा
बुनकर चटाई
ढकें खुली खिड़की।
2
हाँ, बेहयाई !
बिकने लगी आज
दुकानों पर
हया- शर्म से खुद
शर्मसार हुई है ।
3
यादों के गीत
जीवन -संगीत से
करो अलग
जिंदगी रेत नहीं
यादें सोख न पा

4
जीवन -शक्ति
फिर हुई सजीव
मौन मुखर 
बन गुलमोहर
पहन गुलमोहर ।
5
खड़ा अकेला
दृढ़ है जिजीविषा
जितना तपे
उतना ही निखरे
गुलमोहर तरु ।
-0-

मंगलवार, 7 मई 2013

हरसिंगार/ उड़ान


सुनीता अग्रवाल
हरसिंगार
1
नि:शब्द निशा
चटकता यौवन
महकी हवा
अभिसारिका धरा
स्तब्ध निहारे  उषा ।
उड़ान
2
सजे नभ पे
तेरे नैनो के मोती
चन्द्रहार -से
चुग लाता मैं यदि
छू पाता वो आकाश ।
3
ऊँची उड़ान
नशा कामयाबी का
अरे नादान
बेबस ऑंखें तकें
घर जा परिंदे
-0-

शनिवार, 4 मई 2013

तुम हो यादों में


डॉ सरस्वती माथुर
1
तुम  जुगनू बन आओ
रातों को मेरी
आलोकित कर जाओ l
2
तुम धारा मैं नदिया
मुझ तक आने में
कितनी बीती सदियाँ l
3
तुम हो मेरी सजनी
मन में रहती हो
ज्यों पूनम की रजनी l
4
है मेरा दिल खाली 
बगिया का मेरी
है तू ही तो माली l
5
आँखें मेरी पुरनम
तुम हो यादों में
कब होगा अब संगम l
-0-

गुरुवार, 2 मई 2013

मंजिल है मुस्कान


डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
 1
अरे बटोही
मंजिल है मुस्कान
नहीं अधूरी
मुक्त मना- सा बाँट
हो चाह सभी पूरी  
 2
हाट रात की
तुम भी ले आओ न !
कुछ सपने
ऊँचे और प्यारे से
मीठे ,उजियारे से
 3
गाओ रे मन
मैंने गीत सजा
यहाँ प्रीत के
कठिनाई पे जीतें
मजबूत इरादे
 4
धूप सुहानी
क्यों तमक गई हो ?
राह रोकता
देखो -मेघ रंगीला ,
कुछ तो ठंड खाओ !
-0-

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
1
नेह लुटाओ
या ठेस पहुँचाओ,
मर्ज़ी तुम्हारी
अपनी फ़ितरत
सिर्फ़ फूल बिछाना ।
2
लम्बा सफ़र
काँटों -भरी डगर
चलती गई
कभी नहीं झुकी माँ
झुकी आज कमर ।
-0-

सोमवार, 29 अप्रैल 2013

मौसम सर्द हुआ


शशि पुरवार
1
ये मौसम सर्द हुआ
तुम तो रूठ गए
जीवन बेदर्द हुआ ।
2
दिल में फिर टीस जगी 
सुप्त पड़े रिश्ते
जीवन  में आग लगी  
3
वे याद  रही कसमें 
पिय संग निभाई ,
जो वेदी पे रस्में 

4
नीला नभ ठहरा है 
सच्चा प्यार सदा 
इससे भी गहरा है ।
-0-

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

किस्से रीत गए


डॉ सुधा गुप्ता
1
तारे नभ में छिटके
तेरी यादों के
आँसू पलकों अटके ।
2
विरहा का गीत न गा
थपक रही पीड़ा
अब और न आज रुला ।
3
वे किस्से रीत गए
तुझसे मिलने के
सब मौसम बीत गए ।
4
आँसू की धार बही
बोल नहीं फूटे
मन की ना एक कही ।
5
सागर था तूफ़ानी
मेरी क्या हस्ती
तिरना था बेमानी ।
6
चिड़िया जो खेत चुगे
खुश है रखवाला
धन-धन जो भाग जगे ।
7
आकाश उड़ान भरूँ
पंछी तो चाहे-
दुनिया की सैर करूँ ।
8
सुनसान डगर राही
तोड़ो सन्नाटा
आवाज़ इधर  आई ।
9
कस्तूरी खोज थके
बन-बन तुम भटके
पर पैर कहीं न रुके ।
10
ऊषा रानी आई
रजनी के आँसू
फूलों में रख लाई ।
11
सूरज तो था भोला
कैसे बदल गया
बन अनल -भरा गोला
-0-