शुक्रवार, 26 मई 2017

763

1-भारतीय सेना के शूरवीर सैनिकों को समर्पित

1-शशि पाधा
1
कैसी आज़ादी है
सरहद से पूछो
कितनी बर्बादी है ।
2
यह नेता क्या जाने
वीर सिपाही का
साहस ना पहचाने ।
3
अर्जुन सा वार करें 
दुश्मन टोली का 
सैनिक संहार करें ।
4
दुशमन से जूझ जरा
दृढ़ता सैनिक की
पर्वत से पूछ जरा ।
5
आज़ादी पाई है
कितने वीरों ने
निज जान गंवाई है ।
6
जयघोष सुनाना है
सारा जग सुन ले
अब देश बचाना है ।
7
जब पहने रोता है
बेटा सैनिक का
वर्दी से छोटा है ।
8
सीमा पर ध्यान धरो
जन गण भारत के
सैनिक का मान करो ।
9
माँ धीर ज़रा धरना 
गर हम लौटें ना
नित याद हमें करना ।
10
इक रीत निभानी है
गाथा वीरों की
हर रोज़ सुनानी है ।
-0-
 (भारतीय सेना के शूरवीर सैनिकों को समर्पित)
-0-
2-मंजूषा मन
1
संवाद अधूरे हैं,
मन में झांको तो
सब किस्से पूरे हैं।
2
ये मौन डराता है,
चुप तुमको देखे
तो मन घबराता है।
3
कुछ ऐसे रोएँगे,
काँधे सर रखकर
हम खूब भिगोएँगे।
4
हर सफर अधूरा है,
तुम तक पहुँचाए
वह रस्ता पूरा है।
5
छोड़ो अब जाने दो,
मन बौराया है
मन को समझाने दो।
6
तुमसे न कह पाएँ
पर देखो हमको
हम मौन न रह पाएँ ।
7
किससे हम कह पाते,
अपना कौन यहाँ
जिसको गम दिखलाते।
8
मन के बिखरे मनके
टूटे डोरी से
सब रिश्ते जीवन के।
9
शामों के ढलने पर
याद बहुत आए
दीपक के जलने पर।
10
सब राज कहे तुमसे
अब डर लगता है
रूठो न कहीं हमसे।

-0-

मंगलवार, 23 मई 2017

762

डॉ पूर्णिमा राय
1
हम तेरे कायल हैं
साजन आ जाना
घिर आ बादल हैं
2
बादल घिर आ हैं
यादों की गठरी
भर-भर कर ला हैं
3
यह दिल है दीवाना
राह तकें नैना
मौसम भी मस्ताना
4
तुम दूर करो गम को
हँसना जीवन है
त लिख देना हमको
5
खिड़की से झाँक रहा
निर्मोही चंदा
बरबस ही ताक रहा।।
6
बूँदें बन बारिश की
 रोता है अम्बर

बू आ साजिश की।।

गुरुवार, 18 मई 2017

761

1-जुगलबन्दी माहिया
सुनीता काम्बोज
1
 लाए अंगूर पिया
मैं हूँ शहजादी
तुम हो लँगूर पिया।
 0
सहता बारहमासी
ताजी दाल मिली
रोटी मिलती बासी।
2
ये अच्छी बात गढ़ी
अपनी जोड़ी है
चावल के साथ कढ़ी।
 0
शीशा  देखा करना
तुम हो थार पिया
हम हैं मीठा झरना।
3
आ प्यार सिखाऊँगी
थानेदार बुला
फिर जेल कराऊँगी।
 0
मुझसा ना पाओगी
ऐसा करके तुम
सजनी पछताओगी।
4
चिपकी है आज गली
जानम तुम लगती
गुड़ की बस एक डली ।
 0
 मैं गुड़ तुम शक्कर हो
हारोगे हमसे
मत ऐसे  टक्कर लो ।
 5
जिसका साजन लम्बा
देखूँ तो लगता
वो बिजली का खम्बा ।
 0
जीना दुश्वार लगे
मेरी सजनी तू
बिजली के तार लगे ।
6
जिसका सजना मोटा
लुढ़का ही जाए
ज्यों बिन पेंदी लोटा
लोटे में पानी है
टेढ़े दाँत वही
इस दिल की रानी है।
6
सजना है दिलवाला
लाल पजामा है
पहना कुर्ता काला
 0
गालों पर है लाली
नखरे खूब करे
बस मेरी घरवाली ।
7
तुझ पर मैं मरता हूँ
पर तेरी माँ के
डंडे से डरता हूँ
 0
सहलो ये मार पिया
संग चली तेरे
छोड़ा घर- बार पिया
8
छोड़ो तकरार,चलो
अपनी गाड़ी में
लेकर बाजार चलो
 0
क्या आफत आई है
सेल लगी बीवी
थैले भर लाई है
9
थोड़ा तो डरते हो
बीवी के आगे
तुम पानी भरते हो
 0
हम तो बेचारे हैं
पत्नी के आगे
ईश्वर भी हारे हैं ।
10
ये जेब हुई खाली
खूब खरीदारी
करती है घरवाली
 0
 इसमे भी क्या शक है
ये संसार सकल
बीवी का सेवक है ।
 11
 यूँ बहना अच्छा है
बीवी की हाँ में
हाँ कहना अच्छा है
 0
इतनी औकात नही
उसको समझाना
अब बस की बात नहीं ।
12
 घर पर बतलाऊँगी
तेरे रोगों का
उपचार कराऊंगी।
 0
की सेवा सरकारी
बाप दरोगा है  
भाई है पटवारी।
13
मत कर जोरा-जोरी
तुम हो सूत पिया
हम  रेशम की डोरी।
 0
घर की गाड़ी चलती
करने से पहले
तू माना कर गलती 
14
तुझ पर मैं मरता हूँ
पर तेरी माँ के
डंडे से डरता हूँ
0
अब काम नहीं दूजा
मैं दिन रात करूँ
पत्नी  की ही  पूजा 
-0-

2-ताँका - सतीश राठी 

1
गहरा ताल
बचा लिया है जल
बची है नदी
सूरज के ताप से
बची रेत होने से
2
बन बैठी है
सीने पर वजन
याद- पहाड़
कैसे भुला दूँ अब
बजाया जो सितार।
3
बरसात में
भीगती रही वह
समूची रात
आँसू बन बहे थे
बवण्डर बादल।
4
हँसते लब
दिल में घाव सा
खामोश मन
गम की नदिया में
कागज की नाव सा
5
नदी ने पूछा
प्रेम करते हो क्या
दिल ने कहा
प्रेम की कलकल
सीखी है तुमसे ही
-0-
सतीश राठी,आर-451, महालक्ष्मी नगर,इंदौर 452010
9425067204
rathisatish1955@gmail.com

-0-

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

760

1-ताँका
डॉ.सुषमा गुप्ता 
डॉ.सुषमा गुप्ता
1
जीवन तेरा
निर्मल जल- धारा
बहता रह
जग है तेरा सारा
हो विस्तार किनारा ।
2
माँ मत रूठो
मैं हूँ बालक प्यारा
आँखों का तारा
थोड़ा हूँ नटखट
पर राजदुलारा ।
-0-
2-(चोका)
सुनीता काम्बोज

 काली ये रात
काली चादर लिये
फिरती रही
रँगरेज न मिला
रँग दे इसे
लाल,नारंगी,हरा 
दर्पण  देखा 
अचरज क्यों हुआ
जानती थी वो
काले रंग पर क्या
चढ़ पाया है
कोई दूसरा रंग
 कुदरत ने 
उस पर सजाए
स्वर्णिम तारे
रात खिलखिलाई
तृप्ति मन ने पाई।

-0-

मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

759

राजेश काम्बोज 
1.


कैसी मजबूरी है
मिलती ना छाया 
तरुवर से दूरी है ।
2.
पानी भर गागर से
प्यास बुझा लेगी
नदिया मिल सागर  से ।
3.
जीवन संगीत हुआ
यौवन आया तो
हर कोई मीत हुआ
4.
कलियाँ जब मुस्काई 
मेहनत माली की
रंगत फिर से लाई ।

-0-