गुरुवार, 11 नवंबर 2021

1004-प्रेम-गली सँकरी

 

 प्रेम       

सुदर्शन रत्नाकर

      

       मैंने कब कहा तुम मुझ से प्रेम करो। प्रेम करना  या न करना मन की भावना पर , एक दूसरे के प्रति आकर्षण पर निर्भर करता है। ये कोई कपड़े तो नहीं, पहनने  ही पड़ते हैं। हर  एक की प्रेम की परिभाषा अपनी अपनी है। अपना-अपना दृष्टिकोण है। कोई ज़बरदस्ती नहीं, कोई विवशता नहीं। होता है तो बस हो जाता है, किसी से भी। पात्र कैसा है, कौन है,  यह मायने नहीं रखता। प्रेम में प्रतिकार नहीं, प्रतिशोध नहीं प्रतिदान भी नहीं।

प्रेम मीरा ने भी किया था, राधा ने भी किया था। रहीम, सूरदास ने भी किया था। लैला मजनू और सोहनी महिवाल का भी प्रेम अमर है। निस्वार्थ प्रेम, शरीर से ऊपर। आत्मा प्रेमिका है, जो भटकती है सच्चे प्रेम को पाने के लिए। मन बँधता है प्रेम से, दुनिया के संचार का आधार प्रेम है। प्रेम है, तो जीवन है।

फिर अलगाव क्यों, नफ़रत क्यों।

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कठिन बड़ी

प्रेम-गली सँकरी

खोजो तो पाओ।

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सुदर्शन रत्नाकर, ई-29,नेहरू ग्राउंड, फ़रीदाबाद-121001

11 टिप्‍पणियां:

भीकम सिंह ने कहा…

बेहतरीन, हार्दिक शुभकामनाएँ ।

Sudershan Ratnakar ने कहा…

आभार भीकम सिंह जी।

दिनेश चंद्र पांडेय ने कहा…

अद्भुत सुंदर हाइबन की रचना हेतु बधाई।

शिवजी श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर,हार्दिक बधाई।

dr.surangma yadav ने कहा…

बहुत सुंदर प्रेम निरूपण।हार्दिक बधाई।

सविता अग्रवाल 'सवि' ने कहा…

बेहतरीन हाईबन के लिए हार्दिक बधाई |

Rashmi Vibha Tripathi ने कहा…

बहुत ही सुन्दर हाइबन।
हार्दिक बधाई आदरणीया दीदी।

सादर

Reet Mukatsari ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन, हार्दिक बधाई।-परमजीत कौर'रीत'

Vibha Rashmi ने कहा…

सुदर्शन जी, प्रेम की भावना पर बहुत सुन्दर हाइबन। । साथ ही प्रेम के भाव को उभारता हुआ सुन्दर हाइकु । खूब बधाई स्वीकारें ।

Krishna ने कहा…

बहुत ही सुन्दर हाइबन...हार्दिक बधाई दी।

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

हाँ, सच में...प्रेम है तो जीवन है | पर कोई कहाँ समझता है यह ?
कोमल सी भावनाओं से भरे इस हाइबन के लिए मेरी बहुत बधाई |