बुधवार, 29 जून 2022

1048

भीकम सिंह 

 1-नदी 

 


दर्द के आँसू
 

नदी की जिंदगी में 

किसने दिए 

किसने मसल दी 

कोमल काया 

हौसला दुश्मन का

इतना बढ़ा

कि बदलने पड़े 

पुराने रास्ते 

काटती रही मोड़ 

अंधी नस्लों के वास्ते 

-0-

2-माता-पिता 

 

लहरें लौटें

बार-बार तट से 

पर्यटकों के 

इर्द-गिर्द भटके 

ज्यों रुचियों का

मुआयना करती 

वैसे भटके 

माता-पिता हमारे 

माह के सारे 

खर्चों-वर्चों को लेके

जुगाड़-सा करते 

-0-

7 टिप्‍पणियां:

Sushila Sheel Rana ने कहा…

"काटती रही मोड़
अंधी नस्लों के वास्ते ।"

अत्यंत मार्मिक।

माता-पिता पर भी बहुत ही भावपूर्ण रचना। बधाई आदरणीय भीकम जी।

dr.surangma yadav ने कहा…

.....
हौसला दुश्मन का
इतना बढ़ा
कि बदलने पड़े
पुराने रास्ते
काटती रही मोड़
अंधी नस्लों के वास्ते

बहुत सुंदर पंक्तियाँ।हार्दिक बधाई सर!

Rashmi Vibha Tripathi ने कहा…

बहुत ही सुंदर चोका।
हार्दिक बधाई आदरणीय।

सादर

Gurjar Kapil Bainsla ने कहा…

सर आपको प्रथम चोका रचने के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अच्छी रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

प्रीति अग्रवाल ने कहा…

वाह! बेहतरीन चोका! गागर में सागर! धन्यवाद इन सुंदर रचनाओं के लिए ।

Anima Das ने कहा…

वाहह सर अति सुंदर सृजन 🌹🙏😊

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत सुन्दर। हार्दिक बधाई।