1- डॉ जेन्नी शबनम
1.
जीवन होता
पानी का बुलबुला
न दो पल का पता,
क्षणभंगुर,
चाह होती जिन्दा
तो
अमिट हो जीवन !
2.
पानी-सा मन
बह जाता उधर ,
होता ढाल जिधर,
फिर भी यह
वक़्त की थाप पर
थिरकता मगर !
-0-
2-ऋता शेखर मधु
1
झुकी पलक
आँखों में जो उतरा
था वो लाज का पानी
चमका नूर
दिपदिप आँगन
चेहरे पे था
पानी ।
-0-
3-प्रियंका गुप्ता
1
नैनों में नीर
राधा रही पुकार
रुकोगे नहीं श्याम ?
ऐसे निष्ठुर
क्योंकर हुए भला
भूले नेह-बन्धन ।
--0--
4
-रेनु चन्द्रा
1
ये
जीवन है
सुख- दुख संग में
बहता
पानी -रेला,
जीत
गया वो
पार
जो कर गया
जो
डूबा, मर गया।
2
पानी
में अक्स
झिलमिलाते
सदा
ठहर
नहीं पाते,
यादों
के रंग
पानी
के पट पर
चित्र
बना ना पाते।
-0-
5-सुनीता अग्रवाल
1
1
विस्मयकारी
बहुरुपिया जल
जीवन गीत कभी ,
मौत की धुन
दर्पण ,मोती कभी
हीरक झिलमिल ।
-0-
बहुरुपिया जल
जीवन गीत कभी ,
मौत की धुन
दर्पण ,मोती कभी
हीरक झिलमिल ।
-0-
6-जीतेन्द्र सिंह कृष्णावत ,
इंदौर
1
चले जीवन
बहता पानी जैसे
तोड़ सारी सीमाएँ,
जी ले दो पल
बन जीवनधारा
औरो को दे जीवन ।
2
भोर के संग
बहेगा जब जल
मुस्काएँगे कमल ,
बज उठता
जैसे जलतरंग
सुन झूमता मन ।
-0-