गुरुवार, 16 मई 2013

खिले हँसी के रंग


- कृष्णा वर्मा 

संघटित-सा
पर्वत शिखर पे
धवल हिम
सूर्य के संस्पर्श से
पिघल उठा
जल धार बन के
उतर आया
अचल के पैरों में
छुई-मुई-सा
चट्टानों से लिपटा
सोई घाटियाँ
निखरने लगी यूँ
स्पर्श पाते ही
खिल उठे उसकी
छाती पे फूल
ठुमकने से लगे
शाख़ों पे पत्ते
नि:सर्ग के रँगों में
बही चेतना
धरती के होंठों पे
खिले हँसी के रंग।
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7 टिप्‍पणियां:

सुनीता अग्रवाल "नेह" ने कहा…

वाह .. बहुत सुन्दर .. पुरा चित्र आँखो के सामने तैर गया ः) बधायी

ज्योति-कलश ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ....बहुत बधाई आपको !!
सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

ज्योति-कलश ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ....बहुत बधाई आपको !!
सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

ज्योति-कलश ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...बहुत बधाई आपको !!
सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

shashi purwar ने कहा…

bahut sundar waah , krishna ji hardik badhai

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

सुन्दर...बधाई...|
प्रियंका

Dr.Bhawna ने कहा…

Prakrti ka varnan badi bakhubi se nibhaya hai aapne hardik badhai...