8-डॉ जेन्नी शबनम
1
मन की पीड़ा
बूँद -बूँद बरसी
बदरी से जा मिली
तुम न आए
साथ मेरे रो पड़ीं
काली घनी घटाएँ !
2
तुम भी मानो
मानती है दुनिया-
ज़िंदगी है नसीब
ठोकरें मिलीं
गिर -गिर सँभली
जिन्दगी है अजीब !
3
एक पहेली
उलझनों से भरी
किससे पूछें हल ?
ज़िन्दगी है क्या
पूछकरके हारे
ज़िन्दगी है मुश्किल !
4
ओ प्रियतम !
बनके प्रेम-घटा
जीवन पे छा जाओ
प्रेम की वर्षा
निरंतर बरसे
जीवन में आ जाओ !
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