रचना श्रीवास्तव
1
बंद कर दो
घर से निकलना
या परदे में रखो
फूलों की खुश्बू
हवाओं की गति को
बाँध सका है कोई ?
2
न खोना होश
पाक सोच ले कर
आगे आगे चलो तो
बदलेगा ये
समाज सारा अभी
नीयत तो बदलो ।
3
सजती है स्त्री
पोस्टर ,कविताओं
चित्र व प्रचार में
घर आँगन
जहाँ पूजी जानी थी
जला दी जाती वहाँ ।
घर से निकलना
या परदे में रखो
फूलों की खुश्बू
हवाओं की गति को
बाँध सका है कोई ?
2
न खोना होश
पाक सोच ले कर
आगे आगे चलो तो
बदलेगा ये
समाज सारा अभी
नीयत तो बदलो ।
3
सजती है स्त्री
पोस्टर ,कविताओं
चित्र व प्रचार में
घर आँगन
जहाँ पूजी जानी थी
जला दी जाती वहाँ ।
4
चाँद ने ओढ़ा
बादल का घूँघट
रात मध्यम हुई
सूर्य ने आ के
उठाया घूँघट तो
खूब उजाला हुआ ।
5
तारों की नोक
बहुत देर तक
टिका हुआ था चाँद
गुदगुदाया
हवा ने ,तो बादल
की गोद गिरा चाँद ।
6
जख्मी घुँघरू
रात की पायल का
बजता ही रहा था
सुना था यह- ,
जमी थी महफ़िल
बादल के घर में ।
7
बादल का घूँघट
रात मध्यम हुई
सूर्य ने आ के
उठाया घूँघट तो
खूब उजाला हुआ ।
5
तारों की नोक
बहुत देर तक
टिका हुआ था चाँद
गुदगुदाया
हवा ने ,तो बादल
की गोद गिरा चाँद ।
6
जख्मी घुँघरू
रात की पायल का
बजता ही रहा था
सुना था यह- ,
जमी थी महफ़िल
बादल के घर में ।
7
सोया था चाँद
बादलों की गोद में
देखता था सपने
दुष्ट बादल
उसे रौंदता गया
चाँद में दाग़ बना ।
8
इन तारों में
होगा छुपा उसका
नन्हा तारा भी कहीं
सोचके यही
बादलों की गोद में
देखता था सपने
दुष्ट बादल
उसे रौंदता गया
चाँद में दाग़ बना ।
8
इन तारों में
होगा छुपा उसका
नन्हा तारा भी कहीं
सोचके यही
नभ तकती रही
सारी रात एक माँ ।
सारी रात एक माँ ।
-0-